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नागरमोथा से रोगों का उपचार

नागर मोथा एक अत्यंत उपयोगी बूटी है, जो जलीय स्थानों में पैदा होता है। इसकी जड जमीन के अन्दर होती है जिससे मूलकन्द धरती से बाहर निकलता है। यही जडें औषधि रुप में प्रयोग की जाती है। वैसे इसके फूल जून के महीने में खिलते हैं और इसके बाद फल लगते है।

महिलाओं के लिए: नागर मोथा महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। जिन महिलाओं के स्तनों में दूध नहीं उतरता अथवा कम आता है-ऐसी महिलाओं को नागर मोथा का चूर्ण बनाकर 5-5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ सेवन कराने से 10 दिन में ही दूध उतरने लगता है। दूध बनने लगता है। नागर मोथा के चूर्ण का सेवन महिलाओं के गर्भाशय में उत्पन्न विकारों को भी दूर कर देता है।

पाचन शक्ति बढाने एवं नए खून की वृद्धि: जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर पड जाती है-ऐसे व्यक्ति के शरीर में खून की भी कमी हो जाती है ऐसी रोगी को नागर मोथा का चूर्ण, चुकन्दर तथा गाजर के रस के साथ 5 ग्राम सुबह-शाम सेवन कराने से में पाचन शक्ति बढ जाती है तथा शरीर में नया खून बनने लगता है।

नेत्र रोग: नेत्र रोग होने पर नागर मोथा को रात को एक कोरे मिट्टी के बरन में पानी डालकर त्रिफला के साथ भिंगों दें। सुबह उठकर उस पानी को छानकर उससे अपनी आंखों को धोयें। एक हफ्ते के प्रयोग से ही नेत्र रोग दूर हो जाएंगे।

खांसी, कुंडू और कुष्ठ रोग: खांसी, कुंडू व कुष्ठ रोग हो जाने पर 5 ग्राम नागर मोथा के चूर्ण को सुबह-शाम शहद के साथ रोगी को सेवन कराने से तीन दिन में खांसी दूर हो जाती है तथा 40 दिन के सेवन कुंडू और कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।

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