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कपूर से करें कई रोगों का निवारण

कपूर (BUNCHIWANT) का वृक्ष मध्यम आकार का होने के साथ-साथ प्राकृतिक होता है। इसे घनसार भी कहा जाता है। इसके वृक्ष पर फूल अगस्त माह में खिलते हैं तथा फल अगस्त माह में खिलते हैं तथा फल अक्टूबर नवम्बर में लगते हैं। यह वास्तव में चीन तथा जपान में अधिक पाया जाता है। भारत में यह केवल देहरादून मंसूरी, सहारनपुर एवं बंगाल के कुछ भागों में पाया जाता है। औषधि रुप में केवल इसके पत्ते तथा कपूर का ही प्रयोग किया जाता है।

कपूर एक उडनशील एल है, जो ठोस अवस्था में रहता है। इस औषधि की अधिक मात्रा का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

पेट रोग, जिगर की खराबी:  पेट रोग, जिगर की खराबी अथवा पाचन शक्ति कमजोर होने पर कपूर की एक ग्राम मात्रा का प्रतिदिन सेवन करने से ही 10 दिन में पेट के तमाम रोग दूर हो जाते हैं। जिगर के विकारों को हटाकर पाचन शक्ति बडा देता है।

खून में श्वेत कणों की वृद्धि: कपूर का सेवन शरीर के अन्दर खून में श्वेत कणों की वृद्धि करता है। कफ का नाश करता है, किंतु इसकी अधिक मात्रा लेने से शरीर मं दाह एवं मादक विष की क्रिया होती है, जो शरीर के लिए हानिकारक होती है। यह खून के विकारों को भी दूर कर खून साफ करता है और रक्त को भी बढाता है।

श्वांस रोग: श्वांस रोगियों के लिए भी कपूर का कम मात्रा में सेवन अधिक लाभकारी होता है।

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