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दूब से रोगों का अचूक उपचार

दूब का पौधा बहुत छोटा व बिना काटों का होता है जो प्राकृतिक रुप से धरती पर फैलता है। अधिकतर लोग इसे दूब घस भी कहते है। इसके फूल हरे व नीले रंग के मिले जुले नजर आते हैं। यह भारत में हर जगह पाया जाता है। इसका पंचांग ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

रक्त विकार एवं कुष्ठ रोग: जिन लोगों के रक्त में विकार उत्पन्न हो जाते हैं और जिन को कुष्ठ रोग हो जाता है। ऐसे रोगी को दूब के पंचांग के रस में हल्का-सा सैन्धा नमक मिला कर सुबह-शाम 10 दिन तक सेवन कराने से रक्त के विकार दूर हो जाते हैं और खून साफ हो जाता है। 60 दिन के सेवन से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।

खांसी एवं वीर्य रोग: जिन लोगों को शीघ्रपीअन की शिकायत है और जो लोग खांसी के रोग से परेशान है ऐसे रोगी को दूब के पंचांग रस में शहद मिलाक्र सुबह-शाम सेवन कराने से तीन दिन में खांसी दूर हो जाती है तथा 40 दिन के सेवन से शीग्रपतन की शिकायत खत्म होकर वीर्य गाढा हो जाता है तथा उसमें वृद्धि होती है।

गर्मी के तेज बुखार: जिन्हें गर्मी से तेज बुखार हो जाता है-ऐसे रोगी का दूब के पंचांग का रस शहद में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन कराने से बुखार की तेजी कम हो जाती है और एक हफ्ते के प्रयोग में बुखार ठीक हो जाता है।

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