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अगर से रोगों का उपचार

अगर का वृक्ष मध्यम आकार का होता है, जो हिमालय पर्वत पर प्राकृतिक रुप से पाया जाता है। इसके फूल मई जून में खिलते हैं, जो जुलाई में फलों का रुप धारण कर लेते हैं। इसका काष्ठसार एवं तेल ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

दमा रोग: खांसी जब पुरानी हो जाती है तो दमा का रुप धारण कर लेती है। दमा के ऐसे रोगी को अगर के तेल की बून्द देसी पान में डालकर प्रतिदिन सुबह दोपहर और शाम रात सेवन करायें तो 90 दिन में दमा का रोग चला जाता है और फिर रोगी को खांसी का दौरा नहीं पडता।

शोथ (सूजन) : शरीर में शोथ का रोग उत्पन्न होने पर इसके काष्ठ सार की पानी में घिसकर उसका लेप करने से तीन दिन में ही रोग ठीक हो जाता है।

कुंडू, चर्मरोग एवं शरीर दर्द:  कुंडू, चर्मरोग अथवा शरीर के किसी भी भाग में पीडा हो तो इसके काष्ठ सार को पानी में घिसकर उसका लेप करने से तीन दिन में शरीर का दर्द दूर हो जाता है तथा 40 दिन में कुंडू और चर्मरोगों से छुटकारा मिल जाता है।

बुखार, उल्टी एवं पेट रोग: इन रोगों में अगर के काष्ठ सार का चूर्ण 3 ग्राम सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से एक हफ्ते में बुखार, उल्टियां तथा पेट के तमाम रोग ठीक हो जाते हैं।

कान, आंख तथा वात रोग: वात रोगों में आमवात, रक्तवात, कान रोग एवं आंखों के रोगों में अगर के तेल की दो बून्दें सुबह-शाम गर्म पानी में सेवन करने से 10 दिन में ही रोग दूर हो जाते हैं।

कान दर्द में तेल की एक बून्द कान में डालने से कान का दर्द बन्द हो जाता है।

Fastread.in Author Manisha Dubey JhaDear Reader, My name is Manisha Dubey Jha. I have been blogging for 3 years and through the Fast Read.in I have been giving important educational content as far as possible to the reader. Hope you like everyone, please share your classmate too. As a literature person, I am very passionate about reading and participating in my thoughts on paper. So what is better than adopting writing as a profession? With over three years of experience in the given area, I am making an online reputation for my clients. If any mistakes or wrong in the article, please suggest us @ fastread.ait@gmail.com

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