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मेदा लकडी से रोगों का उपचार

मेदा लकडी के वृक्ष को हर मौसम में हरा बने रहने का प्रकृति का वरदान है। इस वृक्ष की छाल अन्दर से लाल रंग की तथा बाहर से काले रंग की होती है। इसके पत्तों को हाथ से मसलने पर सुगन्ध आती है। इसके फूल जून से अगस्त तक खिले रहते हैं तथा फल सर्दी के मौसम में लगते हैं। इसके फल गोलाकर होते हैं। यह वृक्ष भारत के बहुत भागों में पाया जाता है। इसकी छाल का ही औषधि रुप में प्रयोग होता है।

चोट, मोच: यदि शरीर के किसी भाग पर चोट आ जाए या मोच आ जाए तो ऐसी दशा में मेदा लकडी के तेल का लेप या मालिश उन स्थानों पर कर देने से तीन दिन के अन्दर चोट मोच दोनों ठीक हो जाएंगें।

कमर दर्द, आमवात अथवा उन्माद: इन रोगों में मेदा लकडी की छाल का काढा बनाकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से एक हफ्ते में ही रोग दूर हो जाते हैं।

तरुण शोथ (सूजन) : तरुण शोथ में इसके फूलों का लेप करने से तीन दिन में ही रोग दूर हो जाता है। 

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