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रेवन्द चीनी से रोगोपचार

रेवन्द चीनी का दूसरा नाम अमलपर्णी है-क्योंकि इसका पत्ते स्वाद में खट्टे लगते हैं इसलिए इसका नाम अमलपर्णी पड गया। यह पौधा सबसे पहले ईरान चीन, यूनान व अरब देशों में पाया जाता था। वहां से भारत में आया। इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं जो गुच्छों में होते हैं। यह फूल अगस्त सितम्बर माह में खिलते हैं और फल अक्टूबर में आते हैं। इसकी जड का प्रयोग औषधि रुप में किया जाता है।

मूत्र विकारों: मूत्र विकारों में इसकी जड का काढा बनाकर रोगी को सुबह-शाम पिलाने से 10 दिन में ही मूत्र के सारे विकार दूर हो जाते हैं। मूत्र खूलकर आता है।

पाचन शक्ति, गैस एवं जिगरजिन लोगों के जिगर बढ जाते है, तथा पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण गैस के रोग पैदा हो जाते हैं। ऐसे रोगी को रेवन्द चीनी की जड का काढा बनाकर उसमें थोडा सा काला नमक मिलाकर एक-एक प्याला सुबह-शाम सेवन कराने से 40 दिन में बढा हुआ जिगर ठीक हो जाएगा। पाचन शक्ति बढ जाएगी और गैस रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

बच्चों की आमाशय विकृति एवं कुपचन में लाभकारी: जिन बच्चों को अपच की शिकायत रहती है, जिसके कारण आमाशय में पैदा हो जाता है-ऐसे रोगी को रेवन्द चीनी की जड का चूर्ण बनाकर 2-2 ग्राम सुबह-शाम ताजा छाछ अथवा दही के साथ सेवन कराने से 20 दिन के अन्दर रोग से मुक्ति मिल जाती है। पाचन शक्ति मजबूत हो जाती है और बच्चे को खुलकर भूख लगने लगती है।

खांसी : खांसी होने पर भी इसकी जड का काढा बनाकर देने से रोगी की खांसी सात दिन के अन्दर ही जड से चली जाती है।

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