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पाटला से रोगों का अचूक उपचार

पाटला के वृक्ष बडे होते हैं तथा घनी पत्तियों वाले होते हैं। इसकी ताजा छाल चिकनी व हल्के पीले रंग की होती है लेकिन सूखने पर खुरदरी हो जाती है। फल के फूल ऊपर से लाल तथा अन्दर से पीले होते हैं, जो मई-जून में खिलते हैं। फल अक्टूबर में लगते हैं। इसकी जड, छाल, सार और फूल ही औषधि रुप में प्रयोग किए जाते हैं।

शूगर रोग के लिए लाभदायक: शूगर रोगियों के लिए पाटला बहुत ही लाभकारी औषधि है। जिन लोगों को शूगर की बीमारी है-ऐसे रोगियों को पंचांग का सार 5 ग्राम खाने वाले तेल के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 60 दिन में शूगर दूर हो जाते हैं।

खांसी एवं बलगम: खांसी व बलगम के रोगियों को भी पांच ग्राम पंचांग का सार खाने वाले तेल में मिलाक्र सुबह-शाम सेवन कराने से केवल 20 दिन में खांसी दूर हो जाती है। बलगम साफ हो जाता है।

हिचकी होने पर: जिन लोगों को लगातार हिचकियां आती है-वह एक प्रकार का रोग होता है। ऐसे रोगी को पाटला के फूलों के दो चम्मच रस में एक-चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से तीन दिन में ही हिचकी खत्म हो जाती है।

जिगर के रोग: जिगर रोगियों को भी इसके पंचांग का सार गाजर के रस में मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 20 दिन में जिगर के तमाम रोग ठीक हो जाते हैं।

Fastread.in Author Manisha Dubey JhaDear Reader, My name is Manisha Dubey Jha. I have been blogging for 3 years and through the Fast Read.in I have been giving important educational content as far as possible to the reader. Hope you like everyone, please share your classmate too. As a literature person, I am very passionate about reading and participating in my thoughts on paper. So what is better than adopting writing as a profession? With over three years of experience in the given area, I am making an online reputation for my clients. If any mistakes or wrong in the article, please suggest us @ fastread.ait@gmail.com

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