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सरपूंखा से रोगों का उपचार

सरपूंखा के पौधे पूरे भारत में पाए जाते हैं। इसके फूल जामनी व गुलाबी रंग के होते हैं। इसकी फलियां 1 से 2 इंच लम्बी होती है और बीज चितकबरे रंग के होते हैं। अगस्त-सितम्बर में इसके फूल खिलते हैं और फल दिसम्बर के महीने में लगते हैं। इसके पंचांग और सार ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

गंडमाला: कुछ लोगों के गले में गांठे पैदा हो जाती है, जो चारों ओर फैलती चली जाती हैं। इसे गंडमाला कहते हैं। इस गंडमाला के रोगी के गले पर सरपूंखा की जड का लेप करने से 20 दिन में ही वो गांठें बिखर कर साफ हो जाती हैं और नई गांठो का निकलना बन्द हो जाता है।

खाज एवं खुजली: जिन लोगों को खाज या खुजली का रोग हो जाता है-ऐसे रोगी को सरपूंखा के बीज को पानी में पीसकर उस पर सुबह शाम लेप करने से 10 दिन में खोज या खुजली का रोग दूर हो जाता है।

यकृत एवं जिगर : यकृत एवं जिगर के खराब होने पर रोगी को पंचांग के सार का काढा बनाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 15 दिन में यकृत एवं जिगर की खराबी ठीक हो जाती है।

श्वांस रोग: श्वांस का रोग होने पर रोगी को सरपूंखा की जड को जलाकर उसका धूम्रपान कराने से एक माह में ही श्वांस रोग दूर हो जाता है।

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