Print Document or Download PDF

जयंती से रोगों का अचूक उपचार

जयंती के वृक्ष दो प्रकार के होते हैं। एक मध्यम आकार के और दूसरे छोटे आकार के। इसके फूल जुलाई के महीने में खिलते हैं और फल सितम्बर के महीने में लगते है। यह अधिकतर हिमालय की तराइयों में पाया जाता है। इसकी जड, छाल, फूल, बीज और पत्ते औषधि रुप में प्रयोग किए जाते हैं।

जोडों के दर्द: जिन लोगों के जोडों में दर्द होता है-ऐसे रोगी के जोडों पर इसके पत्तों को पीसकर उसका सुबह शाम लेप करने से एक माह के अन्दर ही जोडों का दर्द दूर हो जाता है और रोगी को इस रोग से छुटकारा मिल जाता है।

कण्डुरोग: जिन लोगों के शरीर पर कण्डुरोग फैल जाता है-ऐसे रोगियों की त्वजा पर इसके बीजों के चूर्ण को आटे में मिलाकर उसका लेप करने से 10 दिन में ही कण्डू रोग का नाश हो जाता है।

गलगंड, शोथ कृमि रोग: इन रोगों में रोगी को इस जड व छाल का काढा बनाकर सुबह शाम सेवन कराने से 20 दिन में ही रोगों से मुक्ति मिल जाती है। पेट के कीडे (कृमि) मर कर बाहर निकल जाते हैं। गलगंड व शोथ का रोग दूर हो जाता है।

Read More.


Go Back