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कंजा से रोगों का उपचार

कंजा का पौधा अधिक कांटे वाला होता है इसीलिए इसे कांटा करंज भी कहते है। वैसे यह पौधा अधिक दुर्गन्ध वाला होता है। इसके फल से दो बीज निकलते हैं जो चिकने व अण्डाकर होते हैं। इसके फूल सितम्बर माह में खिलते हैं और फल नवम्बर-दिसम्बर में लगते हैं। यह पूरे भारत में पाया जाता है। इसके बीज, जड और पत्ते ही औषधि रुप में प्रयोग किये जाते हैं।

प्रसूति बुखार: कभी-कभी महिलाओं को प्रसव के बाद बुखार आना शुरु हो जाता है-उसे प्रसूति बुखार कहते है। ऐसी महिलाओं को इसके बीज का चूर्ण 5-5 ग्राम सुबह-शाम गुनगुने सौंठ के पानी से सेवन कराने से 15 दिन में ही बुखार दूर हो जाता है।

कृमि एवं पुराने बुखार: जिन लोगों का बुखार पुराना हो जाता है, वह तपेदिक का रुप धारण कर लेता है। उनके पेटों में कीडे भी पड जाते हैं। ऐसे रोगी को इसके वृक्ष की कोपलों को पीसकर उसका दो चम्मच रस निकाल कर एक चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम देने से 20 दिन में बुखार भी चला जाता है और कीडे भी निकल जाते हैं।

मसूरिका अर्श व पेट रोग: इन बीमारियों का सम्बन्ध पेट से होता है। पेट खराब होने पर ये रोग उत्पन्न हो जाते हैं। अत: ऐसे रोगियों को इसकी जड का काढा बनाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 15 दिन में ही उपरोक्त रोग ठीक हो जाते हैं। पेट के भी समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

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