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जंगली मूंग से रोगों का उपचार

जंगली मूंग की लतायें काफी लम्बी होती है। इसकी फलियां भी मुंग की फलियों जैसी होती हैं ओर गुण जैसे ही होते हैं। इसके पत्ते छोटे तथा फूल पीले रंग के होते हैं। इसकी पैदावार अधिकतर जंगलों में छायादार वृक्षों के पास ही होती हैं। इसके-बीज ही ओषधि रुप में प्रयोग किये जाता हैं।

अतिसार, ग्रहणी एवं रक्तपित्त: इन रोगों से इसके रस का सुबह-शाम रोगी को सेवन कराने से 20 दिन में रोग दूर हो जाता है।

बुखार एवं क्षय रोग : बुखार और क्षय रोग में इसके रस का सुबह-शाम रोगी को सेवन कराने से 10 दिन में बुखार तथा 90 दिन में क्षय रोग दूर हो जाते हैं।

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