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बीजाबोल से रोगों का उपचार

बीजाबोल का वृक्ष झाडियों जैसा होता है। वृक्ष को छिलने पर एक लाल रंग का गाढा रस निकलता है, जो गोन्द होता है। उसे बोल कहते हैं। इसके फूल मार्च-अप्रैल में लिखते हैं और फल मई-जून में लगते हैं। इसके वृक्ष अफ्रीका, अरब, फारस में पाये जाते हैं। मक्का में पैदा होने वाला बीजाबोल वृक्ष सबसे अच्छा माना जाता है। इसक स्वाद खने में कडवा होता है। इसमें उडनशील तेल पाया जाता है। इसके गोन्द का प्रयोग औषधि रुप में किया जाता है। इसके दाने गोल होते हैं, जो लाली लिए हुए पीले रंग के होते है।

खुन साफ करने तथा विटामिन वृद्धि: जिन लोगों के रक्त में विकार उत्पन्न हो जाता है-ऐसे रोगी को इस के गोन्द का चूर्ण 5-5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ सेवन कराने से 15 दिन में ही खून के विकार दूर हो जकर रक्त साफ हो जाता है और खून में विटामिन की वृद्धि होती है।

गर्मी के बुखार एवं वातरोग: जिन लोगों को गर्मी से बुखार हो जाता है। बुखार और गैस के रोग में गोन्द का चूर्ण 5-5 ग्राम ताजा पानी अथवा शहद के साथ सुबह-शाम कराने से 10 दिन में रोग दूर हो जाता है।

मूत्र रोग, जननेद्रिय रोग, सांस की नली का रोग एवं चर्म रोग: इन सभी रोगों में बोल का चूर्ण अथवा उसका काढा बनाकर एक माह तक सुबह-शाम के सेवन से ही रोगी के उपरोक्त रोग दूर हो जाते हैं। चर्म रोगों पर इसका तेल लगाने से भी लाभ मिलता है।

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