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विषभवा से रोगों का उपचार

विषभवा को निर्विषी भी कहते हैं। यह बूटी बछनाग के साथ पैदा होने के कारण विषभवा कही जाती है। यह हिमालय की पहाडियों पर पैदा होती है। इसके फूल जुलाई-अगस्त में खिलते हैं और फल सितम्बर में लगते हैं। इसकी औषधि संग्रह समय सितम्बर अक्टूबर होता है। इसका केवल मूलकन्द औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है। इसकी खुराक 1 ग्राम तक होती है।

जहर का असरजो लोग किसी कारण जहर का सेवन कर लेते हैं अथवा किसी दुश्मनी के कारण जहर का शिकार हो जाते हैं-ऐसे रोगी को तुरंत इसके मूलकन्द का रस निकाल्कर 2 चम्मच सुबह-दोपहर और शाम सेवन कराने से विष का प्रभाव चौबीस घंटे में खत्म हो जाता है और रोगी बच जाता है।

नाडियों के लिए शक्तिवर्धक, मूत्र रोग, जलोदर एवं यकृत रोग: उपरोक्त सभी रोगों के लिए इसका मूलकन्द का चूर्ण एक-एक ग्राम शहद के साथ रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से एक माह में तमाम रोग दूर हो जाते हैं और कमजोर नसों में शक्ति आ जाती है।

पीलिया रोग और अनिद्रा के रोग: जिन लोगों को पीलिया एवं नीन्द न आने का रोग होता है-ऐसे रोगी को इसके मूलकन्द का 2 चम्मच रस निकालकर उसमें 1 चम्मच मिश्री घोल्कर सुबह-शाम सेवन कराने से 10 दिन में ही पीलिया रोग दूर हो जाता है और नीन्द भी खूब आने लगती है।

हर प्रकार के शोथ : शोथ किसी प्रकार का भी हो-उन अंगो पर मूलकन्द को पानी में पीसकर उसका लेप कर देने से तीन दिन में ही शोथ का रोग ठीक हो जाता है।

खांसी: खांसी होने पर मूलकन्द की गोलियां बनाकर मुंह में डालकर चूसते रहने से खांसी दूर हो जाती है।

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