Print Document or Download PDF

छोंकर से रोगों का उपचार

छोंकर का वृक्ष मध्यम आकार का होता है। हिन्दू धर्म में इसे देव वृक्ष माना गया है। इसकी लकडियों को पवित्र माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग हवन या यज़ में अग्नि प्रज्जव्लित करने में किया जाता है। अप्रैल के  महीने में इस पर फूल खिलते हैं और मई में इस पर फल लगते हैं। पौराणिक लोककथा के अनुसार पांडवों ने अज्ञात वास के समय इसी पेड पर अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाये थे। छोंकर को शमी भी कहते हैं और शिवा भी। यह राजस्थान, पंजाब, बुन्देलखण्ड, एवं गुजरात में अधिक पाया जाता है। यह रोग नाशक होता है इसीलिए औषधि के काम आता है।

गर्भपात: जिन महिलाओं को अक्सर गर्भपात हो जाता है-उसको छोंकर के फूलों को कूटकर उसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम कराने से 40 दिन के सेवन से ही गर्भपात नहीं होता।

बबासीर, कृमिरोग, एवं श्वांस: जिन लोगों को बवासीर का रोग हो, या पेट में कीडे पड गए हो अथवा जिन्हें सांस का रोग हो-ऐसे रोगियों को छोंकर की छाल का काढा बनाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 30 दिन में बवासीर खत्म हो जाती है। पेट के कीडे बाहर निकल जाते हैं या मर जाते हैं तथा श्वांस का रोग दूर हो जाता है।

स्वास्थ के लिए: जो लोग शरीर से कमजोर होते हैं-ऐसे लोगों को छोकर की कच्ची फलियों की सब्जी दोनों वक्त सेवन करनी चाहिए। 40 दिन के लगातार सेवन से स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है तो शरीर के रोग दूर हो जाते हैं।

 

Read More.


Go Back