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अकरकरा से रोगों का उपचार

अकरकरा एक कोमल शाखाओं वाला प्राकृतिक पौधा होता है, जिसके फूल तथा मुंडको को जीभ पर रख लेने से चरपराहट सी होने लगती है। गले में कांटे चुभने लगते हैं। वैसे यह एक विदेशी पौधा है जो केवल अफ्रीका, अल्जेरिया तथा अरब देशों में पाया जाता है। इसकी जड का उपयोग औषधि रुप में किया जाता है।

मुंह के रोग: जिन लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं। जख्म हो जाते हैं तथा गले में खराश पड जाती है-ऐसे रोगी को अकरकरा की जड का 1 ग्राम चूर्ण शहद के साथ मिलाकर मुंह में सुबह-शाम लगाने से एक हफ्ते में मुंह के छाले, जख्म और गले की खराश दूर हो जाती है।

गला बन्द: जिन लोगों का गला सर्दी के कारण बन्द हो जाता है-ऐसे रोगी को अकरकरा के गुनगुने पानी से गरारे से बन्द गला साफ हो जाता है और आवाज साफ हो जाती है।

मूत्र रोगों, कम्पवात एवं अपस्मार रोग: जिन लोगों को मूत्र रोग, कम्पवात अथवा अपस्मार का रोग हो जाता है ऐसे रोगी को अकरकरा की जड क काढा बनाकर मिश्री के साथ सुबह-शाम सेवन कराने से एक हफ्ते में मूत्र रोग दूर हो जाते हैं। कम्पवात तथा अपस्मार रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

तन्द्रा एवं जडता रोग: इन रोगों में रोगी द्वारा जड का एक ग्राम चूर्ण दो चम्मच अदरक के रस के साथ सुबह-शाम सेवन करने से 10 दिन में रोग दूर हो जाते है।

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