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शतपुष्पा से रोगों का उपचार

शतपुष्पा को सोया भी कहते हैं, इसका वृक्ष छोटे कद का होता है। इसके फूल छत्रक युक्त पीले रंग के होते हैं और बीज चपटे तथा बारीक होते हैं। फूल दिसम्बर जनवरी में खिलते हैं और फल फरवरी मार्च में लगते हैं। इसके बीज का उपयोग ही औषधि रुप में किया जाता है।

पीलिया, शोथ और पांडुरोग: पीलिया, शोथ रौ पांडुरोग में सोया के बीजों का चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ रोगी को सेवन कराने से एक माह में उपरोक्त रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

वाय-बादी व वात रक्त पीडा: इन दर्दों में बीज को दूध में घिसकर अथवा पीसक्रर उन स्थानों पर लेप करने से 3 दिन में ही दर्द दूर हो जाता है।

पक्षाघात एवं जोडों के दर्द: पक्षाघात होने पर अथवा जोडों के दर्द में सोये के तेल की मालिश सुबह-शाम करने से 60 दिन में दर्द दूर हो जाता है। पक्षाघात के रोगी को आराम मिल जाता है।

जिगर बढने पर: जिन लोगों के जिगर बढ जाते हैं। खास तौर पर यह रोग बच्चों को होता है। ऐसे रोगी को सोया के बीज का चूर्ण 5 ग्राम सर्षप तेल के साथ सेवन कराने से 20 दिन में ही बढा हुआ जिगर ठीक हो जाता है।

गुल्मी रोग: गुल्मी रोगी को सोया के बीज का 5 ग्राम चूर्ण अरंडी के तेल में मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 15 दिन में ही रोग दूर हो जाता है।

कुष्ठ रोग: कुष्ठ रोगी को बीज का 5 ग्राम चूर्ण खदिर के काढे के साथ सुबह शाम सेवन कराने से 60 दिन में कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।

शुष्कवित के रोग: शुष्कविट वाले रोगी को बीज का 5 ग्राम चूर्ण मटन अथवा चिकन तरी के साथ मिला कर सुबह-शाम सेवन कराने से एक माह में रोग दूर हो जाता है।

बच्चों के पेट दर्द एवं अफारा रोग: बच्चों के पेट में दर्द हो अथवा अफारा हो –सोएय के बीजों का एक चम्मच रस निकालकर, एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 24 घंटे के अन्दर दर्द बन्द हो जाता है ओर अफारा दूर होकर पेट मुलायम हो जाता है।

कान दर्द:  कान में दर्द उठने पर सोये के तेल की एक-एक बून्द कान में डालने से दर्द दूर हो जाता है।

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