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धतूरे से रोगों का उपचार

धतूरे का पौधा हर जगह पाया जाता है। इसमें धतूरा अधिक आसानी से मिल जाता है। इसके फूल सफेद रंग के होते है। ये चार प्रकार का होता है। इसके पत्ते, डंठल और फूल भी काले रंग के होते हैं।

दमा: दमा के रोगी को धतूरे के पत्तों को चिलम में रखकर धूम्रपान कराने से दमा का दौरा नहीं पडता और दमा का दौरा रुक जाता है।

वात दर्द एवं सूजन: यदि किसी व्यक्ति के वात दर्द है तथा हाथ-पैरों में सूजन आ गई है तो धतूरे के पत्तों के रस में अफीम और सौंठ को पीसकर उसका लेप कर देने से वात दर्द एवं हाथ पैरों की सूजन दूर हो जाती है।

धतूरे से तंत्र रोग:

बवासीर के रोगी की कमर में काले धतूरे में काले धतूरे के 50 ग्राम भार का एक टुकडा बांध देने से बवासीर का रोग दूर हो जाता है।

शीत ज्वर: शीत ज्वर आने पर सफेद धतूरे को रविवार के दिन उखाड कर पुरुष के दायें हाथ तक तथा औरत के बायें हाथ में बांध देने से शीत ज्वर एक दिन में दूर हो जाता है।

रवि पुष्प रोग में काले धतूरे की जड को धारण करने से किसी भी हिंसक पशु के आक्रमण का भय नहीं रहता।

काले धतूरे की जड को अपनी कलाई पर बांध लेने से ऊपरी हवाओं की बाधा से मुक्ति मिल जाती है।

रविवार के दिन पुष्प नक्षत्र में काले धतूरे की जड अथवा बीजों को गर्भवती स्त्री को कमर में बांध देने से गर्भ-स्तम्भन हो जाता है।

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