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आक से रोगों का उपाचार

आक या मदार की दो जातियां हैं। सफेद और लाल। इसका पौधा शुष्क या ऊसर भूमि में अधिक होता है। लालमदार के पत्ते वट वृक्ष के पत्तों जैसे होते हैं। आक का प्रयोग रोगों के अलावा तंत्र रुप में अधिक किया जाता है।

दर्द एवं शोथ: शरीर के किसी भाग में भी सूजन अथवा दर्द हो तो आक का दूध उस स्थान पर लगाने से दर्द एवं सूजन दोनों ही ठीक हो जाते हैं।

पेट दर्द: पेट दर्द के रोगी को “अर्क पुष्प वटी” देने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।

कान दर्द एवं कृमि: कान दर्द एवं पेट के कीडे हो जाने पर मदार के दूध का आधा चम्मच तथा सौज के दूध का आधा चम्मच तथा चम्मच तथा सोज के दूध का आधा चम्मच मिला कर सेवन काने से दोनों रोग दूर हो जाते है।

बादी बवासीर: बादी बवासीर होने पर मदार के पत्तों पर पांचों नमक, तेल व खटाई लगाकर उन्हें आग में जलाकर भस्म बना लें। फिर दो चम्मच भस्म प्रतिदिन सेवन करने से 20 दिन में ही बादी की बवासीर ठीक हो जाती है।

भगन्दर व नासूर: मदार के दूध को द्रव्यांतर के साथ प्रयोग करने से भगन्दर व नासूर के बन्द मुंह खुल जाए हैं। इसके अलावा आक का दूध, दारुहल्दी तथा थूहर का दूध तीनों को पीसकर उसकी बत्ती बना लें और उस बत्ती को भगन्दर के फोडे के अनर रख दें। इससे भगन्दर की सूजन दर्द व मवाद आना बन्द हो जाएगा।

जाडे का बुखार: शीत ज्वर में मदार की जद के दो भाग तथा काली मिर्च का एक भाग लेकर बकरी के दूध में खूब अच्छी तरह पीसकर मटर के बराबर गोलियां बना लें। फिर रोगी को बुखार चढने से पहले एक गोली ताजा पानी के साथ खिलायें दिन में तीन बार। तीन दिन में ही शीत ज्वर दूर हो जायेगा।

दमा: मदार की जड के चूर्ण में इसी के दूध को मिलाकर धूप में सुखा कर सिगरेट बना लें। फिर इस की सिगरेट की धूर्मपान की तरह प्रयोग करें। 40 दिन में दमा रोग खत्म हो जाएगा।

मदार से तंत्र प्रयोग:

मदार का भी तंत्र में प्रयोग किया जाता है। रवि पुष्प नक्षर में सफेद मदार को जड को दाहिने हाथ में बांध लेने से किसी का भय नहीं रहता।

मदार की जड को एक काले धागे के सहारे कमर में धारण करने वाली बांझ स्त्री भी संतानवती बन जाती है।

 

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