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प्याज है कई रोगों का उपचार

सब्जी बनाने में प्याज का अधिकांशत: हर घर में प्रयोग किया जाता है। सलाद में कच्ची प्याज का उपयोग होता है। यह बहुत से रोगों में औषधि का भी काम करती है।

नेत्र रोगों में:  आंख पांच ज्ञानेन्द्रिय में से एक कहलाती है। इसका अन्य ज्ञानइन्द्रियों से ज्यादा महत्व है, क्योंकि इसके बिना इंसान जीवन से लाचार हो जाता है। मैं उन लोगों की यहां बात नहीं कर रहा जो जन्मान्ध होते हैं। कहते हैं-जन्मांघ लोगों के अंतरचक्षु खुल जाते हैं। मैं यहां उन लोगों के विषय में कह रहा हूं। प्याज के रस की बून्दे हर रोज सुबह-शाम डालते रहने से आंखों के सब रोग दूर हो जाते है तथा आंखों की रोशनी भी बढ जाती है।

जिन लोगों की आंखों में मोतिया बिन्दु उतर जाता है अथवा जाला पडने लगता है-ऐसे लोग साफ रुई की एक मोटी बत्ती बनाकर प्याज के रस में डुबोकर सुखा लें। फिर इसे तिल के तेल में जला कर इसका काजल बनाकर प्रतिदिन सोते समय आंखों में प्रयोग करें। एक माह के प्रयोग से ही आंखों में पडा जाला कटकर साफ हो जाएगा और व्यक्ति को सब कुछ साफ-साफ नजर आने लगेगा।

पेट के कीडे में: जिन लोगों के या बच्चों के पेट में कीडे पड जाते हैं-ऐसे लोगों को खाना-पीना अंग नहीं लगता, ऐसे रोगियों को हर रोज प्याज के रस का एक-एक चम्मच हर दो घंटे बाद पिलाते रहना चाहिए। एक हफ्ते में ही उसके पेट के सब कीडे मर कर पखाने के रास्ते बाहर हो जाएंगे। व्यक्ति स्वस्थ हो जाएगा।

नींद न आने में: नींद न आना भी एक रोग ही है, जिन लोगों को रात में नीन्द नहीं आती, ऐसे लोगों को मानसिक तनाव बना रहता है। अत: ऐसे लोगों को हर रोज सोने से पहले लाल कच्ची प्याज का या भुनी हुई प्याज का पांच चम्मच रस निकाल कर सेवन करना चाहिए। नींद अपने आप ही आ जाएगी और उस व्यक्ति का मानसिक तनाव भी दूर हो जाएगा।

पथरी: जिन लोगों के पथरी है-ऐसे व्यक्ति या रोगी प्याज के आधाकप रस में चीनी गोलकर प्रतिदिन तीन बार बीस दिन तक सेवन करें। पथरी घुलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाएगी और रोगी को इस रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

लू लग जाने एवं पेट रोग: यदि किसी व्यक्ति को लू लग गई है अथवा पेट खराब हो जाता है। ऐसे रोगी को प्याज के आधा कप रस में एक नींबू का रस मिलाकर रोगी को पिलाने से लू का असर खत्म हो जाता है तथा पेट के रोग भी ठीक हो जाते हैं। वैसे भी गर्मी के मौसम में नींबू प्याज का सेवन हर रोज करते रहना चाहिए।

इसी विधि द्वारा मिरगी के रोगी को भी ठीक इया जा सकता है। मिरगी का दौरा पडने पर रोगी को प्याज का रस थोडे से पानी में मिलाकर पिला देने से मिरगी ठीक हो जाती है। मिरगी का दौरा रुक जाता है।

गंजेपन: जिन लोगों के बाल कमजोरी के कारण झडते जा रहे हैं और सिर गंजा होता जा रहा है-ऐसे व्यक्ति के सिर पर नहाने से पहले प्याज के रस की खूब अच्छी तरह मालिश करें। पन्द्रह दिन के अन्दर ही बाल झडने बन्द हो जाएंगे और नए बाल आने लगेंगे।

मां के दूध को बढाने में: जिन महिलाओं के स्तनों में दूध नहीं उतरता-ऐसी महिलायें भोजन के साथ अधिक से अधिक कच्ची प्याज का सेवन करें। कुछ ही दिनों में स्तनों में दूध उतरने लगेगा और बच्चे का पेट भी भर जाएगा।

पीलिया रोग में: पीलिया के रोगी को प्रतिदिन सुबह सिरके या नींबू के रस में भींगी हुई कच्ची प्याज में नमक, काली मिर्च लगाकर पन्द्रह दिनों तक सेवन करायें। रोग खत्म हो जाएगा।

फोडे-फुंसियां: यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर बडा फोरा निकल आया है तो प्याज को पीसकर उसमें गेंहू का आटा, हल्दी, पानी मिलाकर थोडा सा पतला कर लें। फिर तेल में डालकर गर्म करें। जब वह मिश्रण गाढा हो जाये तो उसकी पुल्टिस बनाकर उस फोडे पर सुबह-शाम बान्धे। तीन दिन में ही फोडा फूटकर उसकी कील निकल जाएगी और फोडा ठीक हो जाएगा।

बवासीर: बवासीर के रोगी को आधा कप प्याज के रस में दो चम्मच चीनी तथा एक चम्मच देसी घी का प्रतिदिन सुबह-शाम दो बार एक माह तक सेवन कराते रहने से बवासीर के रोग से मुक्ति मिल जाती है।

कान व दांतों के रोग: दांतों के सब रोगों में कच्ची प्याज का हर रोज सेवन करने से तथा प्याज के रस में दो लोंग पीसकर मिला दें और उससे मुंह का कुल्ला करें। दांतों के समस्त रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएंगे।

यदि किसी के कान में दर्द हो तो प्याज के रस को गुनगुना करके उसकी दो बून्दे कान में डालने से दर्द बन्द हो जाता है।

मूत्र रोग: अगर किसी व्यक्ति का मूत्र किसी कारण से रुक जाए, तो ऐसे व्यक्ति एक प्याज काटकर पानी में उबालें। जब पानी अच्छी तरह पक जाए तो उसे ठण्डा कर के छान लें और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिला दें। तुरंत खुलकर मूत्र आ जाएगा।

हैजा: जिस व्यक्ति को हैजा हो जाए-उसे एक प्याज का रस निकालकर, उसमें पुदीने की पत्तियों का रस, नींबू का रस तथा थोडा-सा नमक मिलाकर हर आधा घंटे बाद एक-एक चम्मच रोगी को पिलाते रहें। हैजा ठीक हो जाएगा।

हैजा फैलने पर इसी रस का एक-एक चम्मच दिन में पांच बार परिवार व पास पडोस के व्यक्तियों को सेवन करायें। हैजे के प्रकोप से बचे रहेंगे।

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