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लहसुन है आपके कई रोगों का उपचार

लहसुन, अपने आप में खुद एक डाक्टर है। वैध है। हकीम है। भारतीय जडी-बुटियों में लहसुन का अपना विशेष स्थान है। यह भी पृथ्वी के अन्दर पैदा होता है। इसकी भी खेती की जाती है। लहसुन में एंटीबायोटिक्स भरपूर मात्रा में पाये जाते है। इसमें एक प्रकार का उडनशील तेल भी पाया जाता है।

ब्लड प्रेशर: लहसुन ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए संजीवनी बूटी के समान है। यह दोनों प्रकार के (हाई व लो ब्लड प्रेशर) ब्लड प्रेशर में तुरंत असर दिखाने वाली औषधि है, जो जादू की तरह काम करती है।

यदि किसी व्यक्ति को लो ब्लड प्रेशर हो जाए तो तुरंत लहसुन की तीन कलियां देसी घी में भूनकर उसमें नमक लगाकर रोगी को खिला दें। दो मिनट में ही यह दवा अपना जादू का असर दिखा देगी और लो ब्लड प्रेशर ठीक हो जाएगा।

अचानक हाई ब्लड प्रेशर होने पर रोगी को तुरंत लहसुन की एक कली किसी पत्थर के चकरे पर दही में घिसकर चटा दें। दो मिनट में ही हाई बल्ड प्रेशर ठीक हो जाएगा।

ब्लड प्रेशर के मरीजों को लहसुन का प्रयोग करते रहना चाहिए। लो ब्लड प्रेशर में कलियों को देसी घी में भूनकर तथा हाई में लहसुन की के- दो कलीको दही के साथ सेवन करते रहना चाहिए। कुछ दिनों के सेवन से ही ब्लड प्रेशर से मुक्ति मिल जाएगी।

जोडों के दर्द: गठिया या जोडों के दर्द से परेशान रोगी को प्रतिदिन दोनों समय भोजन के साथ लहौस्न की एक गठ्ठी की कलियों को देसी घी में भूनकर तीस दिन तक लगातार प्रयोग करें। जोडों के दर्द से छुटकारा मिल जाएगा। इसके साथ ही लहसुन की कलियों से जले हुए सरसों के तेल की मालिश जोडों पर दिन में दो बार अवश्य करें।

दांतों के सभी रोगों में: दांतों का रोग रोगी को चैन से सोने नहीं देता। हर समय बैचेन किए रहता है। दांतों में पायरिया हो, मसूडों में सूजन, दर्द या मवाद आता हो, गन्दा खून बहता हो, मुंह से बदबू आती हो, ऐसे रोगी को लहसुन के तीस बून्द रस में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार तीस दिन चटायें। दांतों के रोग से छुटकारा मिल जाएगा। अथवा 50 ग्राम लहसुन की कलियों को सरसों के थोडे से तेल में खूब अच्छी तरह भून लें। फिर तेल को नीचे उतार कर उसमें 50 ग्राम भुनी हुई आजवाइन, दस ग्राम भुनी हुई लोंग तथा 10 ग्राम काला नमक मिलाकर उसे कूटपीस कर मंजन बना लें। फिर उस मंजन को हर रोज दो बार दांतों पर प्रयोग करें। इससे दांतों के रोग भी दूर हो जाएंगे तथा मुंह की बदबू दूर हो कर दांत मोतियों से चमक उठेंगे।

निमोनिया: जिस बच्चे को निमोनिया का असर हो जाए-उसे लहसुन का एक चम्मच रस गर्म पानी में मिलाकर आधे-आधे घंटे बाद पिलाते रहें। साथ में लहसुन का तेल गर्म करके उस तेल की मालिश बच्चे की छाती, गर्दन व पसलियों पर कर दें। साथ में उस तेल में तले हुए लहसुन की कलियों को मुनक्के के साथ खिला भी दें। निमोनिया का असर खत्म हो जाएगा और बच्चा ठीक हो जाएगा।

उपरोक्त उपचार खांसे के रोग के लिए भी लाभकारी है। इस विधि द्वारा खांसी ठीक हो जाती है।

पेट के रोग एवं गैस:  पेट के समस्त रोगों में लहसुन अतयंत लाभकारी है। विशेष तौर पर गैस का तो जानी दुश्मन है। पेट के दर्द में व्यक्ति को लहसुन की एक कली पानी के साथ सेवन करनी चाहिए। पांच मिनट में ही दर्द बन्द हो जाएगा। पेट के रोगी को लहसुन का देसी घी में भूंकर दाल-साग में तडका लगाकर खाना चाहिए। गैस के रोगी को लहसुन का सेवन हरे साग के साथ करना चाहिए। बीस दिन के सेवन से ही उपरोक्त रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

कैसर: कैंसर का भयंकर रोग मृत्यु दूत माना जाता है अर्थात् कैंसर का रोग जीवन के साथ ही जाता है। अत: इस लाइलाज तथा नामुराद बीमारी से बचाव करना ही अति उत्तम है। प्रत्येक व्यक्ति को कैंसर के रोग से बचाव के लिए हर रोज भोजन करने के पश्चात लहसुन की तीन कलियां चबा लेनी चाहिए। ऐसी व्यक्ति को कैंसर का रोग कभी नहीं हो सकता। इस उपचार से पेट में गैस भी नहीं बनेगी।

जख्म तथा चोट: यदि किसी बच्चे या व्यक्ति को अचानक शरीर के किसी भाग पर चोट लग जाने के कारण कोई जख्म हो जाए तो तुरंत लहसुन की दस कलियों को छील्कर किसी पत्थर के चकले पर महीन पीस लें। फिर उसमें थोडी सी पिसी हल्दी मिलाकर देसी घी अथवा सरसों के तेल में पकाकर उसे ठण्डा करके घाव तथा चोट वाले स्थान पर लगा दें। तीन दिन में ही घाव भर जाएगा। चोट अच्छी हो जाएगी।

जहर: यदि किसी व्यक्ति ने किसी जहरीली चीज (दवा) का सेवन कर लिया है तो फौरन प्राथमिक उपचार के रुप में एक गिलास लहसुन का रस उस व्यक्ति को पिला दें। जहर का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा और जीवन खतरे में नही पडेगा।

पीलिया: पीलिया के रोगी को पांच लहसुन की कलियां पीसकर एक पाव गाय के दूध के साथ प्रतिदिन सुबह शाम पन्द्रह दिन तक सेवन करना चाहिए। पीलिया का रोग खत्म हो जाता है।

हृदय रोग: हृदय-रोग में लहसुन प्राथमिक उपचार के रुप में बहुत लाभकारी है। हृदय-रोग का सबसे मुख्य कारण धमनियों में कोलेस्ट्रोल नामक पदार्थ का जमा होना, जिससे खून की धमनियां सिकुडकर रोग ग्रस्त हो जाती है। उनमें खून का बहाव कम हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पडे तो उस व्यक्ति को कच्चे लहसुन की पांच कलियां तुरंत चलाकर खा लेनी चाहिए इससे दिल के दौरे का प्रभाव कम हो जाता है और खतरा टल जाता है।

मिरगी: मिरगी के रोगी को दौरा पडने पर लहसुन की कुछ कलियां कूट्कर सुघा देनी चाहिए। रोगी तुरंत होश में हो जाएगा।

टी.बी.: फेफडों पर कफ जमा हो जाने के कारण फेफडे खराब हो जाते हैं जो टी.बी. का रुप धारण करते हैं। टी.बी. के रोगीको लहसुन की खीर बनाकर खिलाने से चार माह के अन्दर रोग से मुक्ति मिल जाती है। 250 ग्राम गाय के दूध में लहसुन की दस कलियों को डालकर उबालिए। कुछ देर बाद जब कलियां दूध में गल जाए तो उसे उतारकर ठण्डा करके उसमें दो चम्मच शक्कर मिलाकर रोगी को दिन में तीन बार, चार माह तक सेवन करायें। रोगी ठीक हो जाएगा। यदि कभी फेफडे में रोगी को दर्द का एहसास हो उसे लहसुन के रस में रुई भिगोकर सूंघना चाहिए। इससे फेफडे में जमा कफ साफ हो जाएगा, क्योंकि लहसुन कफनाशक होता है। टी.बी. के रोगी को खाने के पश्चात लहसुन की पांच कलियां रोज चबानी चाहिएं। इससे भी टी.बी के रोग में लाभ पहुंचता है।

लकवा: लकवा एक भयानक रोग है। शरीर के जिस हिस्से के खून का बहाव बन्द हो जाता है अथवा धमनियों में खून जम जाता है वह भाग निस्तेज होकर बेकार हो जाता है। इसी को लकवा कहते हैं, किंतु लकवे का उपचार लकवे का असर होने के 24 घंटे के अन्दर ही शुरु कर देना चाहिए वरना फिर रोग का ठीक होना मुश्किल हो जाता है।

लकवे के रोगी को 30 ग्राम छिले हुए लहसुन की कलियां एक पाव गाय के दूध में खीर बनाकर दिन में तीन बार एक हफ्ते तक सेवन करायें। साथ में 250 ग्राम छिले हुए लहसुन की कलियां, 500 ग्राम सरसों का तेल, तथा एक लीटर पानी को मिलाकर एक सथ आग पर उबालें। जब पानी पुरी तरह जल जाए तब तेल को नीचे उतार कर ठण्डा कर लें ओर शीशी में भरकर रख लें। उस तेल  से लकवे के रोगी की उस भाग की मालिश दिन में तीन बार प्रतिदिन करें। हर रोज लहसुन की सात कलियां दो चम्मच मक्खन के साथ रोगी को खिलाते रहें। रोगी जल्दी ही लाभ प्राप्त कर स्वस्थ हो जाएगा।

नपुंसकता: नपुंसक व्यक्ति को प्रतिदिन 50 ग्राम लहसुन का 50 ग्राम देसी घी में हलुवा बनाकर दो बार सेवन करायें। तीन माह के सेवन करने पर ही उस व्यक्ति की नपुंसकता खत्म होकर उसके शरीर में नयी शक्ति आ जाएगी। नया जोश भर जाएगा।

स्तन रोग: नारी के स्तनों में ढीलापन आ जाना भी उसके अन्य नारी रोगों की तरह एक रोग है। अत: उस महिला को, जिसके कम आयु में ही स्तनों में ढीलापन आ गया है-पांच लहसुन की कलियां हर रोज एक पाव गाय के दूध के साथ सोते समय तीस दिन तक सेवन करनी चाहिएं। इससे स्तन पुष्ट हो जाएंगे। नसें सुदृढ हो तन जाएंगी। अत: स्तन सुडौल और भरे हुए नहर आएंगे।

सिर दर्द: दर्द चाहे आधे सिर में हो या पूरे सिर में-ऐसे रोगी के माथे पर लहसुन को पीसकर उसका लेप कर दें। उसकी दोनों कनपटियों पर भी लेप लगा दें। उसकी नाक के नथुने में लहसुन की नस्वार दें। सिर दर्द तीन दिन में ही हमेशा के लिए छूमंतर हो जाएगा।

कान-रोग: यदि कान में दर्द है तो लहसुन की दो कलियों को सरसों के तेल में जला लें। फिर उस तेल को हलका सा गुनगुना रहने पर उसकी दो बून्दें रोगी के कान में डाल दें। दर्द बन्द हो जाएगा। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।

यदि किसी का कान बहता हो या उसके कान में जख्म हो गया हो तो प्रतिदिन सुबह-शाम तेल की दो बून्दे डालते रहिए। कुछ ही दिनों कान बहना बन्द हो जाएगा और जख्म भी भर जाएगा।

मलेरिया बुखार: मलेरिया का बुखार व्यक्ति को कमजोर कर देता है यह बुखार दो तरह का होता है। एक जो जाडा लगकर व्यक्ति को चढता है दूसरा वह जो एक दिन छोडकर व्यक्ति को चढता है। जो बुखार जाडा लगकर चढता है-ऐसे रोगी के हाथ पैरों के नाखुनों पर लहसुन को पीसकर उसका लेप कर दें। इसके साथ दूसरे किस्म के बुखार में एक चम्मच लहसुन के रस में तिल का तेल मिलाकर रोगी को जब तक बुखार न चढे-तब तक दो-दो घंटे बाद पिलाते रहें। चार दिन में ही बुखार से छुटकारा मिल जाएगा।

पाचन-क्रिया: जिस व्यक्ति की पाचन-क्रिया सही नहीं रहती उस व्यक्ति को पेट के अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को, लहसुन की पांच कलियां थोडा सा जीरा, थोडा-सा पिसा धनिया, नमक स्वाद के अनुसार तथा एक चुटकी पिसी मिर्च को मिलाकर बारीक पीस लीजिए। उसके बाद उस मिश्रण में एक नींबू का रस निचोड दीजिए और अच्छी तरह मिला दीजिए। चटनी तैयार हो जाएगी दोनों वक्त भोजन के साथ उस चटनी का सेवन कराएं। तीन दिन में ही पाचन-क्रिया सही हो जाएगी। पाचन शक्ति भी बढेगी ओर पित्त भी शांत रहेगा।

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