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तुलसी की पत्तियों से रोगोपचार

पत्तियां, प्रकृति की देन है। भारत वर्ष में अनेकों प्रकार के पेड-पौधे व लतायें पायी जाती है, जिनकी पत्तियां ही अनेक रोगों की अचूक होती है और जिनके प्रयोग से भयंकर से भयंकर घातक रोगों का भी सफल उपचार किया जा सकता है। अनेकों ऐसी गुणकारी पत्तियां हैं, जिनका जबाव किसी भी पैथी में  नही है।

हम यहां केवल पेड-पौधों की पत्तियों से ही अनेक रोगों के सस्ते और सफल उपचार का वर्णन कर रहे है, जिन्हें हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कठिन तप और साधना के बाद प्राप्त किया था।

सबसे पहले हम उस गुणकारी बुटी (पत्ती) का वर्णन करेंगे, जिसका कोई जबाव पूरे संसार में नहीं है। वह एक ही बूटी है जो अनेकों रोगों की अकेली दवा है-और वह है तुलसी का पौधा।

मानव जाति के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है तुलसी की पत्ती। यह तो गुणो की खान होने के साथ-साथ शुद्ध प्रयावरण के लिए बहुत लाभप्रद सिद्ध हुई है। यह प्राकृतिक बूटी है।

बच्चों के लिए लाभकारी: बच्चों के रोग बडों के रोगों से भिन्न होते हैं। अत: उनका उपचार भी अलग तरीके से करना पडता है। छोटे बच्चों को अक्सर पेट की शिकायत ज्यादा होती है। जैसे, पेट फूल जाना, दस्त या पेचिश लग जाना, खांसी-जुकाम होना, उल्टियां आना आदि रोग पैदा हो जाते हैं। अत: इन रोगों में तुलसी के पत्तों के रस में थोडा-सा अदरक का रस डालकर उसमें शुद्ध शहद मिलाकर उस शर्बत को एक शीशी में भरकर रख लें। जरा-सी शिकायत होने पर बच्चे को एक छोटा चम्मच शर्बत सुबह और शाम दो वक्त पिलाएं। बच्चा ठीक हो जाएगा। इस शर्बत का प्रयोग टॉनिक के रुप में भी बिना किसी रोग के अपने बच्चे को प्रतिदिन पिलाते रहें। बच्चा निरोगी और स्वस्थ बना रहेगा।

निमोनिया: बच्चों को निमोनियां जल्दी असर करता है। ऐसी दशा में दस तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर उसमें दो काली मिर्च पीसकर मिला लें। फिर थोडा-सा शहद मिलाकर एक-एक चम्मच एक-एक घंटे बाद पिलायें। उसकी छातीव पसलियों पर सफेद तेल की मालिश कर रुई बांध दे। 24 गंटे के उपचार से ही निमोनिया का असर खत्म हो जाएगा और बच्चा स्वस्थ हो जाएगा।

बडों, को निमोनिया होने पर 25 तुलसी के पत्ते, और उसमें दस काली मिर्च डालकर खूब अच्छी तरह बारीक पीस्कर उस मिश्रण को एक गिलास पानी में मिलाकर रोगी को पिला दें। उस पानी का दिन में तीन बार सेवन करें। निमोनिया अपने आप भाग जाएगा।

बच्चों के दांत निकलने पर: छोटे बच्चों के दांत बडे कष्ट दे कर निकलते हैं। वे मसूडों की हड्डी फोड्कर बाहर निकलते हैं। दांतों के निकलने में बच्चे को दस्त भी लग जाते हैं। ऐसे समय में कोई दवाई असर नहीं करती, किंतु तुलसी के पत्ते एक ऐसी दवा है, जिसके सेवन से बच्चों के दांत बडी आसानी से बाहर निकल आतें हैं। अत: तुलसी के रस में थोडा सा शहद मिलाकर बच्चों के मसूडों पर मलें। थोडा-सा चटा भी दें। दिन में तीन चार बार ऐसा करने से थोडे दिनों में ही बच्चों के दांत निकल आते है और बच्चे को तकलीफ भी नहीं होती।

जिगर की खराबी तथा मलेरिया बुखार होने पर: जिन लोगों का जिगर खराब हो गया हो और जिन लोगों को मलेरिया बुखार ने जकड रखा हो ऐसे व्यक्तियों को तुलसी के 21 पत्तों को दो लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी जब 1 लीअर रह जाए तो उस पानी को थोडा-थोडा करके रोगी को दिन में तीन चार बार पिलाएं। एक हफ्ते में ही उपरोक्त दोनों रोग ठीक हो जाएंगे।

नकसीर होने पर: तुलसी के रस में थोडा सा नमक मिलाकर रोगी को दिन में तीन बार आधा-आधा कप सेवन करायें। तीन दिन में ही नाक से खून आना बन्द हो जाएगा।

हिचकी होने पर: हिचकी कभी-कभी रोगी को जानलेवा भी बन जाती है। हिचकी जब बन्द न हो तो 20 ग्राम तुलसी का रस, 10 ग्राम शहद दोनों को मिला कर पीने से हिचकी खत्म हो जाती हैं और व्यक्ति को चैन मिल जाता है।

बवासीर: बवासीर भी एक नामुराद बीमारी है जो रोगी को काफी कष्ट देती है। बवासीर के मस्सों पर तुलसी के पत्तों का प्रतिदिन दो बार लेप लगायें। पन्द्रह दिन में ही मस्से झड जाएंगे और बवासीर का रोग हमेशा के लिए चला जाएगा।

ह्रदय रोग व टॉनसिल: टॉनसिल का रोग गले का है तथा ह्रदय रोग छाती का है। ऐसे रोगी को तुलसी के दानों की असली माला पहना दें। यह माला हर वक्त गले में पडी रहनी चाहिए। इसके साथ प्रतिदिन सुबह-शाम 11-11 पत्ते तुलसी के रोगी को चबाने चाहिएं। तीन माह में दोनों रोगों से सदा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

संग्रहणी: संग्रहणी के रोग में रोगी का शरीर सफेद पड जाता है। खून बनना बन्द हो जाता है। दस्त लगे रहते हैं। ऐसे रोगी को तुलसी के 11 पत्तो का चूर्ण बनाकर उसमें थोडी-सी मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार 40 दिनों तक रोगी को सेवन करायें तथा खाने में हलका भोजन दें। रोग खत्म हो जाएगा ओरु रोगी स्वस्थ हो जाएगा।

अजीर्ण मंदाग्नि: जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो गई है। भूख नहीं लगती । ऐसे रोगी को तुलसी के ताजा 21 पत्ते, 7 काली मिर्ची हर रोज दोनों वक्त खाना खाने के बाद चबाने के लिए दें। दस दिन में ही यह रोग ठीक हो जीगा।

दूसरी विधि के अनुसार तुलसी के 21 पत्तों को 100 ग्राम पानी में डालकर उबालें। पानी जब आधा रह जाये यानि कि 50 ग्राम रह जाए तो उसमें थोडा सा काला नमक व चुतकी भर सौंठ मिला कर सुबह शाम रोगी को उस काढे का दस दिन तक सेवन करायें। अजीर्ण मन्दाग्नि का रोग ठीक हो जाएगा। भूख भी खुलकर लगेगी।

मिरगी: मिरगी सबसे खतरनाक रोग है। इस रोग में रोग में रोगी का अकेले बाहर निकलना बडा ही हानिकारक होता है, क्योंकि मिरगी के रोगी को यह पता नहीं रहता कि उसको कब और कहां मिरगी का दौरा पड जाए और वह गिर पडे। अत: ऐसे रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम तुलसी के पत्तों को पीसकर अपने शरीर की मालिश करनी चाहिए। 60 दिन की लगातार मालिश से मिरगी के दौरों से रोगी को हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है। चाहें तो तुलसी के पत्तों को मालिश के साथ-साथ खिलाते भी रहिए। लाभ देंगे।

बालों के रोग: आजकल कम उम्र में ही बालों का सफेद हो जाना-एक रोग है, जिससे युवाओं की उम्र भी काफी लगने लगती हैं और बाल भी अधिक झडने लगते हैं। ऐसे लोगों को तुलसी के पत्तों को आंवले के चूर्ण के पानी में भिंगोकर प्रतिदिन आधा घंटे तक सिर पर लेप करें। इसके बाद बालों को धो डालें। 60 दिनों तक इस विधि को अपनाने से सफेद बाल काले व मजबूत हो जाएंगे तथा बालों का झडना भी बन्द हो जाएगा।

दिमाग की गर्मी: जिन लोगों के दिमाग में अचानक गर्मी चढ जाती है-ऐसे लोगों को तुलसा जी के पन्द्रह पत्तों को 5 काली मिर्च तथा थोडी सी मिश्री के साथ पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम सेवन करा दें। तीन दिन में ही दिमाग की गर्मी खत्म हो जाएगी।

मोटापा: मोटापा एक रोग है जो दिन पर दिन लोगों में फैलता जा रहा है। मोटापे को कम करने केल इए एक चम्मच तुलसी का रस तथा एक चम्मच शुद्ध शहद दोनों को एक गिलास पानी में घोलकर सुबह शाम व्यक्ति 60 दिनों तक लगातार सेवन करें। मोटापा कम होता चला जाएगा।

सिरदर्द: सिरदर्द आज के जमाने में एक आम बात है। सिर दर्द में तुलसी की नसवार्के प्रयोग से जल्दी ही सिर दर्द से मुक्ति मिल जाती है। तुलसी की नसवार तैयार करने के लिए तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर खूब कूट पीसकर एक शीशी में भरकर रख्लें। नसवार तैयार हो गई। जिन लोगों को यह नसवार दी जाएगी उसे सिर दर्द से मुक्ति हो जाएगी।

मुंह की बदबू: कुछ लोगों के मुंह से अक्सर बुरी बदबू आने लगती है। लोग ऐसे व्यक्ति को अपने पास खडे होने देना तक पसन्द नहीं करते। ऐसे रोगियों को हर समय अपने मुंह में तुलसी के पत्ते को रखना चाहिए। कुछ ही दिनों में उसके मुंह से आने वाली बदबू खत्म हो जाएगी और तुलसी की खुशबू आने लगेगी।

सफेद दाग: सफेद दाग एक किस्म का रोग होता है जो धीरे-धीरे शरीर में फैलता चला जाता है और शरीर की पूरी त्वचा को सफेद कर देता है। कुछ दाग फोडे-फुंसी या अन्य रोगों के कारण भी शरीर पर पड जाते हैं, जो बहुत भद्दे लगए हैं। ऐसे रोगियों को तुलसी के तेल की दिन में चार बार मालिश करनी चाहिए।

तुलसी के पौधे का जड से उखाड कर पानी से खूब अच्छी तरह धोकर साफ कर लें ताकि उसमें मिट्टी का कोई अंश न रह जाए। फिर उस पौधे को पीसकर आधा किलो मीठे तेल (तिल का तेल) में मिलाकर उसमें आधा लीटर पानी डाल कर आग पर उबाल लें। जब पानी पूरा सूख कर तेल भी जलकर आधा रह जाए तो उसे कपडे से छान लें। तुलसी का तेल तैयार हो जाएगा। इस तेल को एक शीशी में भरकर रख ले और भी कई रोगों में काम आ सकता है। जैसे गठिया के रोग या चोट-मोच के दर्द में।

खांसी और दमा में: पुरानी खांसी ही दमा का रुप ले लेती है। जो व्यक्ति के जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक होती है। ऐसे में साधारण तौर पर रोग के आरम्भ में तुलसी के पत्तों के रस का एक चम्मच, एक चम्मच शहद, एक चम्मच अदरक का रस तथा एक चम्मच प्याज का रस लेकर चारों का मिश्रण कर ले और रोज रात को सोते समय रोगी को 40 दिन तक सेवन करायें। शुरु में दमा के रोग से मुक्ति मिल जाएगी। यदि रोग पुराना हो गया है तो तुलसी के पत्ते, कत्था कपूर और इलायची इन सब को बराबर मात्रा में लेकर खूब अच्छी तरह पीस लें और फिर मटर के दाने के बराबर गोली बनाकर रख लें। दो गोली सुबह-शाम तुलसी के पानी के साथ 60 दिनों तक रोगी को सेवन करायें। दमा का रोग चला जाएगा।

सर्दी लगने तथा बुखार होने पर: अक्सर व्यक्ति को सर्दी लगने पर बुखार आ जाता है। गले में खराशें पड जाती है। ऐसे रोग में तुलसी के 21 पत्तों का रस, 3 ग्राम अदरक का रस, 5 काली मिर्च पीसकर तथा 3 चम्मच शहद मिलाकर 100 ग्राम पानी में डालकर आग पर उबालें। पानी जब आधा रह जाए तो नीचे उतार कर ठण्डा कर लें। इस काढे को प्रतिदिन दिन में तीन बार तीन दिन तक रोगी को पिलायें। रोगों से छुट्टी मिल जाएगी। गले की खराश भी दूर हो जाएगी। इससे सीने की जलन भी दूर हो जाती है। खट्टी- मीठी डकारें भी आनी बन्द हो जाती है।

चर्म रोगों तथा जलने पर:  जिन लोगों को चर्म रोग हो गया हो अथवा कोई जल गया हो, तो 50 ग्राम तुलसी के पत्तों को, 200 ग्राम गोले के तेल तथा 200 ग्राम पानी के साथ मिलाकर आग पर पकायें। पानी जब पूरी तरह से जल जाए तो उसमें 5 ग्राम मोम डालकर खूब अच्छी तरह मिला लें। बस मलहम तैयार है, उस मलहम को चर्म रोगों पर अथवा जले हुए स्थान पर लगाएं, एक हफ्ते में ही चर्म रोग दूर हो जाएंगे। जला हुआ स्थान ठीक हो जाएगा।

साधारण दाद-खाज-खुजली के लिए तुलसी के पत्तों का रस तथा उसी मात्रा में नींबू का रस लेकर मिला लें। फिर उसको उन स्थानों पर दिन में चार बार लगाएं। कुछ ही दिनों मे उन रोगों से मुक्ति मिल जाएगा।

अन्य रोगों में उपयोगी: तुलसी के पत्ते कई रोगों में काम आते हैं। तुलसी के पत्तों का पानी यदि गुर्दे के रोगी को प्रतिदिन पिलाया जाए तो गुर्दे के दर्द में आराम मिल जाता है।

मन्द बुद्दि : मन्द बुद्दि वाले बच्चों को तुलसी के पत्तों का रस तथा शहद मिला कर प्रतिदिन चटाने से बुद्धि तेज होती है।

टाइफाइड एवं टूटी हुई हड्डियों को ठीक करने के लिए: बिगडे हुए बुखार (टाइफाइड) तथा टूटी हुई हड्डियों को ठीक करने के लिए तुलसी के पत्तों का पानी रोगी को प्रतिदिन सेवन कराना चाहिए। रोग ठीक हो जाएगा।

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