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ब्राह्नी के पत्तों से रोगों का उपचार

ब्राह्नी, प्राकृतिक रुप से भी पैदा होती है और इसकी खेती भी की जाती है। ब्राह्नी अधिक पानी वाली जमीन में ही पैदा होती है। ब्राह्नी अन्यंत गुणकारी बूटी है जो औषधि रुप में ही प्रयोग की जाती है।

मन्दबुद्धि: जिन लोगों की बुद्धि आयु के साथ परिपक्व नहीं होती-ऐसे लोग मन्द बुद्धि कहलाते है-यानि कि उनकी बुद्धि का विकास नहीं हुआ है। ऐसे मन्दबुद्धि लोगों को ब्राह्नी की पत्तियों का एक चम्मच रस, बादाम के एक चम्मच रस में घोल कर सुबह शाम गाय के दूध में मिश्री डालकर 60 दिनों तक सेवन करायें। बुद्धि में विकास हो कर बुद्धि तेज हो जाएगी।

दिमागी काम: जो लोग (बच्चे-बडे) दिमागी काम करते हैं। जैसे पढने वाले बच्चे, नौकरी करने वाले स्त्री-पुरुष, जो लिखने-पढने का काम अधिक करते हों-ऐसे लोगों को ब्राह्नी की पत्तियों के रस का, गाय के दूध के साथ सेवन कराने से दिमागी शक्ति बढती है। सिर दर्द पैदा नही होता। नजर कमजोर नहीं होती।

मानसिक रोग: मानसिक रोगों से ब्राह्नी का रस तो अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मानसिक रोगियों को ब्राह्नी रस के दो चम्मच, दो चम्मच शहद तथा एक गिलास गाय के दूध के साथ प्रतिदिन सोते समय सेवन करायें। एक हफ्ते के प्रयोग में ही मानसिक रोगी को शांति मिल जाएगी और उसका मानसिक तनाव भी स्वत: खत्म हो जाएगा।

अन्य रोगों में: ब्राह्नी का रस कुष्ठ रोग, प्रमेह, कास, रक्तविकार तथा रक्तपित्त आदि रोगों में भी बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है। यह फोडे-फुंसियों को साफ करती है। इस बूटी के निम्न मुख्य योग भी हैं- ब्राह्नी रसायन, ब्राह्नीघृत, ब्राह्नीतेल तथा ब्राह्नी वटी।

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