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रासना की पत्तियों से रोगोपचार

रासना के पौधे छोटे कद के एक वर्ष की आयु के होते हैं। इसके फूल बैंगनी रंग के होते हैं। यह पौधा मैदानी भागों में अधिक पाया जाता है। इस पौधे की पत्तियां ही औषधि रुप में प्रयोग की जाती है।

पक्षाघात: जिन लोगों को पक्षाघात हो जाता है-ऐसे रोगी को रासना की पत्तियों का रस निकाल कर रोगी के शरीर पर प्रतिदिन चार बार मालिश करें। तीन माह के उपचार से ही रोगी को लाभ हो जाएगा।

गैस रोग: गैस के रोगी को रासना की पत्तियों का दो चम्मच का दो चम्मच रस, एक चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच नींबू का रस तीनों को मिलाकर उसमें थोडा सा काला नमक मिलाकर प्रतिदिन भोजन करने के पश्चात सेवन करना चाहिए। एक हफ्ते के प्रयोग में ही गैस से मुक्ति मिल जाएगी।

बवासीर: बवासीर के रोगीको रासना की पत्तियों का रस निकालकर प्रतिदिन दिन में तीन बार मस्सों पर लगाएं। 20 दिन के उपयोग से ही बवासीर के मस्से अपने आप झर कर गिर जाएंगे और रोगी को बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।

गृघ्रसीवात एवं आमवात: आमवात एवं गृघ्रसीवात के रोग में रासना की पत्तियों का रस बहुत लाभदायक है। रोगी को प्रतिदिन तीन बार रासना की पत्तियों के रस का प्रयोग करना चाहिए। 40 दिन के प्रयोग से ही रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

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