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पान से रोगों का इलाज

पान, भारत वर्ष का आदिवासी पौधा है, जो वर्षा वाले मैदानों में बहुत ज्याद पनपता है। हमारे देश में पानों की अनेकों किस्में पाई जाती है। जैसे, बनारसी पान, मघई पान, लंका पान, कपूरी पान, बंगला पान, तथा देसी पान आदि। इन में सबसे अधिक देसी पान गुणकारी होता है। पानों की सबसे अधिक खेती महोबा में होती है। पान की लता एक दूसरे के सहारे बढती है। पान की बेल पर फूल आने का समय अप्रैल-मई का महीना होता है। परवल पान का ही फल है, जो सब्जी में काम आता है। पान एक औषधि के रुप में अधिक प्रयोग किया जाता है। वैसे धार्मिक दृष्टि से पान हर पूजा में प्रयोग किया जाता है। कहते हैं-पान के बिना पूजा पूरी नहीं होती।

खांसी व दमा: खांसी और दमे के रोगियों के लिए तो पान बहुत उपयोगी है, क्योंकि पुरानी खांसी ही धीरे-धीरे दमा का रुप धारण कर लेती है। ऐसे में देसी पान का एक चम्मच रस, अदरक का एक चम्मच रस, एक चम्मच शहद मिला कर हल्का गरम करके खांसी व दमा के रोगियों को दिन में चार बार सेवन करायें। खांसी एक हफ्ते के सेवन से ही दूर हो जाती है, जबकि दमे के रोगी को इसका सेवन तीन माह तक लगातार करना चाहिए। दमा के रोगी को अधिक से अधिक खाली पान भी बिना कुछ लगाए चबाते रहना चाहिए। इससे दमा का दौरा नहीं पडता और रोगी चैन से रहता है।

फोडे-फुंसियां: पान फोडे-फुंसियों में भी लाभकारी है। जिन लोगों के फोडे अधिक निकलते हैं-उन लोगों के फोडों पर देसी पान को हल्का सा देसी घी लगाकर गरम करके उस फोडे पर बांध दें। यह विधि दिन में दो बार अपनाएं। तीन दिन के प्रयोग से ही फोडा पककर फुट जाएगा और उसकी कील निकल जाएगी। रोगी को फोडे से छुटकारा मिल जाएगा।

सांस की नली: सांस की नालियों में जब विकार उत्पन्न हो जाता है, तो पान उस नली को साफ करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। ऐसे रोगी को जिसकी सांस नली में यदि कोई रुकावट आ गई हो तो उसकी पान का सेवन करना चाहिए। उसे दिन में तीन-चार पान बिना सुपाडी के खाने चाहिए तथा उसका रस पेट के अन्दर ही जाना चाहिए। 10 दिन लगातार प्रयोग करने से ही सांस की नलियां साफ हो जाती है।

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