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बिजया (भांग) के पत्तों से अचूक रोगों का इलाज

बिजया को भांग भी कहते हैं। आम तौर पर लोग इसे भांग के नाम से ही जानते हैं। कुछ लोग इसे शिवबूटी भी कहते हैं। इसके पौधे छोटे आकार के होते है। भारत के कुछ क्षेत्रों में इसकी खेती होती है। यह एक नशीली बूटी होती है। इससे गांजा तथा चरस जैसी नशीली चीजें भी तैयार की जाती है। भांग के पत्तों पर जो रालदार पदार्थ चिपक जाता है-उसे खुरचकर इकट्ठा किया जाता है जो चरस कहलाता है। इसके मादा पौधों से गांजा तैयार होता है। उत्तर प्रदेश, बंगाल और बिहार में यह पौधा विशेष रुप से पाया जाता है।

भांग बहुत से रोगों में औषधि रुप में भी प्रयोग की जाती है।

भूख न लगने तथा नींद न आने वाले रोगों में: जिन लोगों को भूख नहीं लगती तथा जिन लोगों को नीन्द न आने की शिकायत है- ऐसे रोगियों को औषधि के रुप में भांग का सेवन कराना चाहिए, क्योंकि अनिद्रा भी एक रोग होताह ऐ। भूख का न लगना भी के रोग है। अत: ऐसे लोगों को प्रतिदिन शाम के समय भांग का एक चम्मच चूर्ण ताजा दूध के साथ सेवन कराने से भूख भी लगने लगेगी और नीन्द भी आने लगेगी। किंतु इसका सेवन न तो अधिक मात्रा में करें और न अधिक दिनों तक वरना रोगी को इसके नशे की आदत पड जाएगी। रोग ठीक होते ही इसका सेवन बन्द कर देना चाहिए।

पाचन शक्ति तथा काली खांसी: भांग की पत्तियां पाचन शक्ति बढाती है तथा काली खांसी को दूर करती है। भांग की पत्तियों के रस को, एक चम्मच शहद में मिला कर काली खांसी के रोगी को सुबह-शाम केवल दस दिन तक सेवन करायें। काली खासी दूर हो जाएगी।

पाचन शक्ति को बढाने के लिए भांग की पत्तियों का एक चम्मच चूर्ण ताजा एक कप दूध के साथ रोज शाम को भोजन करने से पहले दस दिन तक सेवन करायें।

बवासीर: बवासीर के रोगी की पीडा को दूर करने के लिए भांग की पत्तियों को द्दोह में उबाल कर उसे पीसकर बवासीर के मस्सों पर सुबह शाम उसका लेप करें। पन्द्रह दिन के अन्दर ही मस्से झडकर साफ हो जाएंगे और रोगी को बवासीर के रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

नपुंसकता: जो लोग नपुंसकता के शिकार है-उनके लिए भांग की पत्तियां रामबाण औषधि हैं। ऐसे लोगों को प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक चम्मच भांग के चूर्ण को खाकर उसपर मीठा दूध का सेवन करना चाहिए। 40 दिन के सेवन से ही रोगी के शरीर में कामोत्तेजना भर जाएगी। नया जोश पैदा हो जाएगा और नपुंसकता दूर हो जाएगी।

सावधानी बरतें: भांग एक नशीली वस्तु है, जो तासीर में ठण्डी होती है। अत: इसका सेवन अधिक मात्रा में न करें वरना यह लाभ देने के बदले रोगी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होगी। इसलिए रोगी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इसका सेवन एक सीमा तक ही करें।

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