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भोजपत्र से रोगों का उपचार

भोजपत्र का वृक्ष हिमालय की पहाडियों पर, कुमायूं, हिमाचल प्रदेश, भूटान, सिक्किम तथा धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले काश्मीर पें पाया जाता है। इसके फूल जून-जुलाई में आते हैं, लेकिन फल शीतकाल में लगता है। वैसे भोजपत्र धार्मिक कार्यों एवं तंत्र मंत्र की विधाओं में अधिक प्रयोग किया जाता है। भोजपत्र कुछ रोगों में औषधि का भी काम करता है। प्राचिन काल में भोजपत्रों को कागज के रुप में इस्तेमाल किया जाता था, जो कई सौ वर्षों तक सुरक्षित रहता था।

खांसी और बुखार: बुखार और खांसी के रोग में भोजपत्रों का दो-चम्मच रस एक चम्मच शहद के साथ मिलकर रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम चार दिन तक सेवन करायें। बुखार उतर जाएगा और खांसी खत्म हो जाएगी।

कान के बहने में: जिन लोगों का कान बहता हो-ऐसे रोगी के कान में भोजपत्र क रस हल्का गुनगुना करके प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें। 20 दिन के प्रयोग से ही कान का बहना बन्द हो जाएगा।

भूतबाधा, एवं ग्रह दोष हो तो: बहुत से सिद्ध पुरुष एवं तांत्रिक भूत बाधा दूर करने तथा ग्रह-दोषों को समाप्त करने में भोजपत्रों का प्रयोग करते हैं जिनसे कुछ की लाभ भी होता है और बहुतों को नहीं भी होता। भोजपत्रों का उपयोग तंत्र-पत्रों एवं यत्रों के लिए भी किया जाता है।

 

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