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अरण्डी के पत्तों से रोगोपचार

अरंडी यह चौडे पत्तों का छोटे कद वाला पौधा होता है, जो प्राकृतिक रुप में जन्म लेता है। यह पौधा भारत में आम पाया जाता है। इसके बीजों अंडी का तेल निकाला जाता है, जो औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है। इसके पत्ते भी औषधि रुप में बहुत काम आते हैं।

शोध तथा गुम चोट: अरंडी का पत्ता शोध और गुमचोट में बहुत लाभकारी माना जाता है। ऐसी चोटों पर अरनडी का पत्ता गर्म करके बांध देने से कुछ ही दिनों में चोट ठीक हो जाती है। शोध क रोग भी खत्म हो जाता है। ऐसी चोटों पर अरंडी का तेल भी मल देने से लाभ पहुंचताह ऐ।

पेट की गांठों में: जिन लोगों के पेट में कब्ज की गांठे पड जाती है और हर समय दर्द होता है-ऐसे रोगी को अरंडी का 50 ग्राम तेल पिला देना चाहिए। अरंडी का तेल केवल दिन में एक बार ही प्रयोग करना चाहिए और अधिक से अधिक तीन दिन तक इस्तेमाल करना चाहिए। इस तेल के सेवन से पेट में पडी गांठें निकल जाएंगी और पेट साफ हो जाएगा।

वात रोग: वात रोगों में अरंडी के पत्ते व तेल बहुत लाभकारी होते हैं इनका प्रतिदिन एक दिन इस्तेमाल एक माह तक करते रहने से वात रोगों से रोगी को छुटकारा मिल जाता है।

उदर कति बस्ती के रोग: पेट के फूल जाने पर, अथवा पेडू और कमर में दर्द होने पर अरंडी के तेल को हल्का सा गर्म कर उस जगह पर मल देने से ही रोगी को लाभ मिल जाता है। इस विधि का प्रयोग तीन दिन तक लगातार करना चाहिए। रोग दूर हो जाते हैं।

अरंड से तंत्र प्रयोग:

अरंडी का प्रयोग तंत्र में भी किया जाता है। यदि ऋतुस्नाता स्त्री अरण्डी के तीन बीजों का तीन दिन सेवन कर ले तो उसके गर्भ धारण करने के बाद गर्भ नही गिरता

“अरण्ड बीज मृत्वंते भुक्तं स्तम्भकरं मतम।“

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