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तेजपात से रोगों का उपचार

तेजपाल का वृक्ष सदा हरा रहने वाला प्राकृतिक वृक्ष होता है। इसकी छाल मधुर, सुगनधित व भूरे रंग की होती है, जिसे देसी दाल चीनी कहते हैं। यह वृक्ष पहाडी क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। तेजपात के पत्ते व उसकी छाल को ओषधि के रुप में भी प्रयोग करते हैं और गर्म मसाले के रुप में भी। इसकी तासीर गर्म होती है। ये अनेक रोगों में काम आता है।

खांसी और दमा: खांसी और दमा के रोग में 500 ग्राम तेजपाल के पत्तों को पानी में उबालना चाहिए। जब ये उबलकर आधा रह जाएयं तो उसमें थोडी सी मिश्री मिली कर प्रतिदिन तीन बार आधा-आधा कप रोगी को पानी पिलायें। तीन दिन के सेवन से खांसी दूर हो जाएगी तथा तीन माह के लगातार सेवन से दमा का रोग चला जाएगा।

बुखार और अतिसार: सर्दी से बुखार आ जाने पर या अतिसार का रोग हो जाने पर रोगी को, तेजपात के पत्तों का चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण, एक चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करायें। तीन दिन में बुखार चला जाएगा और के माह के लगातार सेवन से अतिसार का रोग ठीक हो जाएगा।

उल्टियां व पेट रोग: जिस व्यक्ति के पेट में गैस बनती हो, खट्टी-मीठी डकारें आती हों, या खाना हजम न होता हो। उल्टियां आती हों। ऐसे रोग में तेजपाल के पेड की छाल को 100 ग्राम पानी में डालकर उबालें। पानी जब 50 ग्राम रह जाए तो नीचे उतार लें। फिर कपडे से छानकर थोडा सा काला नमक, आधे नींबू का रस तथा एक चम्मच मिश्री मिलाकर दो-दो चम्मच दिन में चार बार रोगी को सेवन करायें। एक दिन में उल्टी आनी बन्द हो जाएगी। तीन दिन में खट्टी मीठी डकारें आनी बन्द हो जाएंगी। पेट का दर्द ठीक हो जाता है। दस दिन के लगातार प्रयोग से पेट की गैस खत्म हो जाती है।

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