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गुलाब के फूल से कई रोगों का उपचार

फूल जो शिर्फ भगवान पर चढाने या फिर किसी फंकसन में नही आपितु रोगों में भी उपयोग किया जाता है, फूल, सिर्फ देखने में ही सुन्दर नहीं लगते बल्कि ये बहुत गुणकारी होते हैं। बहुत से रोगों में यह औषधि रुप में रुप में भी काम में लाए जाते हैं। फूलों से अनेक प्रकार के इत्र तैयार होते हैं।

गुलाब, फूलों का राजा कहलाता है। यह प्रकृति की अनुपम देन है जो देखने में ही सुन्दर नहीं लगता-बल्कि यह गुणों की खान भी है। सुगन्ध में मनोहरी है और रोगों में औषधि का भी काम करता है। इसकी तासीर ठण्डी होती है। यह फूल कितने ही रंगों में पाया जाता है। वैसे यह मूल रुप से सीरिया का पौधा है। य अब जंगली न होकर-व्यापारी बन गया है।

लू लगने पर: गुलाब के फूलों से गुलाब का शर्बत बनाया जाता है। तेज गर्मी के दिनों में अक्सर लोगों को लू लग जाती है। लू लगने वाले रोगियों के लिए गुलाब जल तथा गुलाब का शर्बत अमृत का काम करता है। ऐसे रोगियों को एक गिलास गुलाब का शर्बत देने से लू का असर कम हो जाता है। लू लगने वाले रोगी को दिन में तीन बार गुलाब के शरबत का सेवन करना चाहिए। लू का असर खत्म हो जाता है।

नेत्र रोग: जिन लोगों की आंखों में गन्दा पानी भर जाता है अथवा आंखें गर्मी के कारण लाल हो जाती है-ऐसे रोगी को अपनी आंखों में गुलाब जल का प्रयोग करना चाहिए। आंखों में गुलाब जल डालने से आंखों में ठण्डक पहुंचती है। आंखों के अन्दर की गन्दगी बाहर निकल जाती है तथा आंखों की रोशनी भी बढती है।

बेहोशी होने पर: कभी-कभी तेज गर्मी के कारण अक्सर लोग (स्त्री-पुरुष) बेहोश हो जाते हैं। ऐसे लोगों के मुंह पर गुलाब जल के छांटे मारने से वे फिर होश में आ जाते हैं। गुलाब जल के छींटों से रोगी के मन को शांति भी मिलती है।

मुंह की दुर्गन्ध: बहुत से लोगों के मुंह से बुरी दुर्गन्ध आने लगती है। मुंह की यह दुर्गन्ध उस व्यक्ति को किसी के पास खडा नहीं होने देती। लोग उससे दूर खडे होकर बात करते हैं। ऐसे लोगों को सुबह-दोपहर और शाम खाली पान के साथ गुलकन्द का सेवन करना चाहिए। एक हफ्ते में मुंह की दुर्गन्ध दूर हो जाएगी और सांसों से खुशबू आने लगेगी। गुलकन्द वैसे भी सेहत के लिए लाभकारी होता है।

कब्ज: जिन लोगों के पेट में कब्ज होती है-ऐसे लोगों को 20 ग्राम गुलकन्द गुनगुने दूध के साथ रात को सोते समय सेवन करना चाहिए। इससे पेट साफ हो जाता है। दस दिन के लगातार सेवन से पुरानी से पुरानी कब्ज भी दूर हो जाती है तथा पेट के विकार भी दूर हो जाते है।

शरीर के ताप: जिन लोगों के शरीर में अधिक गर्मी होती है-ऐसे रोगी को ताजा गुलाब के फूलों के अर्क का शर्बत बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। दस दिन के लगातार सेवन से शरीर के अन्दर की बढी हुई गर्मी खत्म हो जाती है।

जिगर रोग: जिगर के रोगियों के लिए गुलाब का शरबत और गुलकन्द अत्यंत लाभदायक है। ऐसे लोगों को दिन में दो बार गुलाब के शरबत का सेवन करना चाहिए तथा रात को सोते समय गुलकन्द का सेवन करना चाहिए। पन्द्रह दिनों के लगातार सेवन से ही जिगर के तमाम रोगो ठीक हो जाते हैं और पाचन क्रिया भी ठीक प्रकार से चलने लगती है।

भूख कम लगने पर: गुलाब का शर्बत तथा गुलकन्द लोगों की भूख बढाता है, क्योंकि यह अन्न पचाने का काम करता है। अत: शरबत और गुलकन्द के सेवन से लोग रोग से मुक्त रहते हैं।

गैन्दा के फूल से रोगोपचार: गैन्दा के पौधों को अपने बगीचे की शोभा चढाने के लिए लोग अपने घरों में लगाते हैं। गैन्दे का पौधा एक मीटर तक की ऊंचाई वाला होता है। इसके फूल पीले रंग के होते है। अधिकतर इसके फूलों की मालाएं बनायी जाती है, जो पूजा ब्याह-शादियों में सजावट आती है। गैन्दा के फूलों व पत्तियों में औषधि गुण भी होते है, जो रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किए जाते हैं।

रक्तार्श रोग: रक्तार्श के रोगियों को गैन्दा के फूलों के रस का सेवन कराने से ही रक्तार्श के रोग से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे रोगी को फूलों के रस का एक चम्मच, एक चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सात दिनों तक सेवन करायें। रोग ये मुक्ति मिल जाती है।

शोध रोग: शोध रोगों में गैन्दा के पत्तों का लेप बहुत लाभप्रद होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम लेप करने से सात दिन में ही शोध रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

कान के दर्द: जिन लोगों के कान में दर्द हो जाता है-ऐसी रोगी के कान में गैन्दे के फूलों के रस की दो बून्दें डालने से आराम मिल जाता है। दर्द दूर हो जाता है।

आंखों के रोग एवं व्रण: आंखों एवं व्रण रोग में फूलों के ऊपरी भाग का लेप करने से आंखों के रोग एवं व्रण रोग से छुटकारा मिल जाता है।

बुखार : गर्मी के बुखार में गैन्दा के फूलों के रस का सेवन एक चम्मच सुबह शहद के साथ तथा एक चम्मच शाम को शहद के साथ सात दिन तक लगातार कराने से बुखार दूर हो जाता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है।

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