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मौलसरी के फूलों से रोगों का इलाज

मौलसरी, को बकुल भी कहते हैं। इसके वृक्ष मध्यम कद के घने व चिकने होते हैं। मौलसरी के फूलों का रंग सफेद होता है, जो सुगन्धित होते हैं। यह फूल कभी अकेले और कभी मंजरियों के रुप में खिलते हैं। यह वृक्ष भारत के सभी उद्दानों एवं सडकों के किनारे लगा होता है। इस वृक्ष के फूलों के अतिरिक्त, इसके फल और छाल भी औषधि रुप में प्रयोग की जाती है।

नारी रोगों में: मौलसरी के फूल व फल नारी रोगों के उपचार के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। महिलाओं के रोगों में लुकोरिया, मासिक-धर्म विकार, योनि विकार तथा बांझपन ही मुख्य हैं। इन रोगों में महिला रोगियों को मौलसरीके फूलों का रस, कूंजा मिश्री के साथ एक चम्मच सुबह-शाम 40 दिन तक लगातार सेवन करायें। रोगों से मुक्ति मिल जाएगी। किंतु बांझपन में 4 माह तक रस का सेवन करायें। बांझपन दूर हो जाएगा और स्त्री गर्भवती हो जाएगी।

दांत के रोगों में:  दांतों के हिल जाने पर मौलसरी की छाल के रस में पिप्प्ली, शहद एवं देशी घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह और रात को सोने से पहले गरारे अथवा कुल्ला करें। पन्द्रह दिनों तक, प्रतिदिन दोनों वक्त 15 मिनट तक कुल्ला करने से दांत मजबूत हो जाएंगे। हिले हुए दांत अपनी जगह जम जाएंगे।

मौलसरी की छाल से प्रात: काल प्रतिदिन दातून करने से दांतों के अनेक रोगों से बचाव हो सकता है।

सांसों के दुर्गन्ध को दूर करें: जिन लोगों के मुंह से सांस के साथ दुर्गन्ध आती हो-ऐसे रोगियों को प्रतिदिन सुबह-शाम मौलसरी के फूलों के रस में 250 मि.ली. पानी मिलाकर उसमें थोडा-सा शाहद, एक चम्मच देसी घी तथा दस बून्द लौंग का तेल डालकर 20 दिनों तक कुल्ला अथवा गरारे करने चाहिएं। सांस की दुर्गन्ध दूर हो जाएगी और खुशबू आने लगेगी।

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