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चमेली के फूलों से रोगों का उपचार

चमेली, एक आरोही लता है, जो प्राकृतिक रुप में हिमालय पर्वत के नीचे की ढलानों में अधिक पाई जाती है। दिसम्बर से मार्च तक इस पर फूल लगते हैं। यह फूल सुगन्धित और सफेद रंग के होते है। इसके फूलों के अलावा पत्ते भी औषधि के रुप में प्रयोग किए जाते हैं। इसके फूलों की तासीर ठण्डी होती है, जिन लोगों के कोठे गर्म होते हैं-उनके लिए फूलों का रस अमृत है।

चर्म रोग: जिन लोगों के खून में विकार उत्पन्न हो जाते है-उन्हें चर्म रोग जल्दी होता है। ऐसे रोगियों को चमेली के फूलों के रस में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दो-दो चम्मच सेवन कराएं। एक माह के सेवन में ही खून के अन्दर के विकार दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही चमेली के फूलों का लेप चर्म रोग वाली जगह पर करें। चर्म रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

कान बहने पर: जिन लोगों के कान से मवाद बहने लगता है। कान में चमके से (टींसें) मारते हैं-ऐसे रोगीके कान में चमेली के पत्तों का तेल प्रतिदिन दो बार डालने से केवल दस दिन में ही कान से मवाद बहना बन्द हो जाएगा। टींसें खत्म हो जाएंगी, दर्द से छुटकारा मिल जाएगा

कुष्ठ रोग: कुष्ठ रोग में चमेली के फूलों का रस, शहद के साथ सुबह शाम सेवन करने से बहुत लाभ मिलताह ऐ। चार माह तक फूलों के रस का सेवन कुष्ठ रोगी को प्रतिदिन करायें तथा चमेली के पत्तों के तेल की मालिश कुष्ठ रोग वाले स्थान पर दिन में तीन चार बार करें। कुष्ठ रोग दूर हो जाएगा।

अन्य रोगों में: चमेली के फूल और पत्ते कितने ही छोटे रोगों में काम आते हैं। सिर दर्द होने पर फूलों का लेप करें। मुंह के छालों में फूलों के रस का सेवन करें। शरीर में अचानक गर्मी पैदा हो जाने पर फूलों के रस का शर्बत प्रयोग करें। आंखों के रोग में चमेली के फूलों का आंखों के बाहरी भाग पर लेप करें। लाभ होगा।

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