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हार सिंगा के फूलों से रोगों का उपचार

हारसिंगार, को राग पुष्पी के नाम से भी पुकारा जाता है। इसके फूल सुगन्धित सफेद, गुलाबी रंग के होते हैं। इसका वृऍक्ष झाडीदार होता है, जिसके पत्ते लम्बे और नुकीले होते हैं। इस वृक्ष पर फरवरी से मार्च तक फूल लगते हैं। इसके पत्ते, बीज और फूल औषधि के रुप में भी प्रयोग किए जाते हैं।

मलेरिया तथा अन्य बुखार: मलेरियां बुखार हो या कोई अन्य बुखार। हारसिंगार के फूलों के दो चम्मच रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को दिन में तीन बार सेवन कराने पर, सात दिनों में ही रोग दूर हो जाता है।

गैस रोग: जिन लोगों को गैस की शिकायत है-असिए रोग में, हार सिंगार के पत्तों को 200 ग्राम पानी में डालकर उबालें। जब आधा रह जाए तो नीचे उतार कर छान लें। फिर उसमें थोडा-सा काला नमक, एक चम्मच अदरक का रस तथा एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर दिन में दो बार रोगी को सेवन करायें। 20 दिन के प्रयोग से ही गैस का रोग खत्म हो जाएगा।

कृमि रोग: बच्चों के कृमि रोग में हारसिंगार के पत्तों के रस को एक एक चम्मच सुबह-शाम सेवन कराने से दस दिन में ही कृमि रोग खत्म हो जाता है। बच्चा स्वस्थ हो जाता है।

सिर का गंजापन: जिन लोगों के सिर के बाल कमजोर होकर झडने लगते हैं और सिर गंजा हो जाता है-ऐसे रोगी के सिर पर हार सिंगार के बीजों को जल में पीसकर लेप कर दें। आधा घण्टे बाद साबुन से धो दें। एक माह के प्रयोग में ही सिर पर नए बाल आने लग्नेगे। कुछ ही दिनों में सिर का गंजापन दूर हो जाएगा।

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