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नागकेशर के फूलों से रोगों का उपचार

नागकेशर के पुंकेशर बहुत सुन्दर, मनभावन होते हैं, जो औषधि के काम आते हैं। इस वृक्ष के फूल सुन्दर होने के साथ-साथ लुभावने भी होते हैं, जो मार्च से अप्रैल माह तक खिले रहते हैं। पीला नाग केसर बहुत महंगा होता है-इसलिए कुछ धोखे बाज लोग नागकेशर को ही केसर कहकर बेचते हैं, जो मालाबर क्षेत्र में बहुत पाया जाता है। वैसे नाग केशर में पीले नाग केसर जैसे गुण तो नहीं होते, फिर भी औषधि रुप में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

रक्तप्रदर, रक्तपित्त, रक्तकास एवं रक्तातिसार होने पर: उपरोक्त रोगों में नागकेशर सबसे उत्तम तथा लाभदायक औषधि है। इसके एक चम्मच पुंकेशर को दूध या पानी में घोलकर रोगी को सुबह-शाम पिलाने से केवल 40 दिन में ही उपरोक्त रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

सन्धिवात ( जोडों का दर्द) तथा पामा होने पर: जोडों के दर्द तथा पामा आदि रोगों में आधा तोले नाग केशर के चूर्ण को 25 ग्राम मक्खन में मिलाकर चीनी के साथ रोगी को सुबह शाम सेवन करायें। 60 दिनों में उपरोक्त रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। इसके साथ ही नागकेशर के बीजों के तेल की मालिश भी दिन में तीन बार जोडों पर अवश्य कराते रहें। बहुत लाभ पहुंचेगा। दर्द दूर हो जाएगा।

रक्तस्त्रावी अर्श: जिन महिलाओं को गर्भ के दौरान रक्तस्त्राव हो जाता है-ऐसी महिलाओं को एक तोला नागकेशर 50 ग्राम मक्खन व दो चम्मच चीनी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करा दें। तीन दिन मे6 रक्त आना बन्द हो जाएगा।

स्वास्थ्य: जिन लोगों का शरीर कमजोर है। काम करने की शक्ति नहीं है। ऐसे रोगी को नागकेशर के फूलों का एक तोला चूर्ण एक पाव गाय के दूध के साथ मिश्री मिलाकर सुबह और रात को 40 दिनों तक सेवन करायें। रोगी तन्दुरुस्त व फुर्तीला हो जाएगा। शरीर मं नया जोश भर जाएगा।

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