Print Document or Download PDF

चम्पा के फूलों से रोगों का उपचार

चम्पा के फूल सुगन्ध से भरे हुए सुनहरे रंग के होते हैं। इसके पत्तों से भी सुगन्ध आती है। यह फूल विषनाशक गुणों वाला होता है। इस के वृक्ष 20 मीटर तक ऊंचे होते हैं, जो बंगाल और असम के जंगलों में प्राकृतिक रुप से पैदा होते हैं। वैसे घर के उद्दानों में भी इसके वृक्ष लगाए जातेह ऐ। इसके फूल अप्रैल माह से जून माह तक वृक्षों पर खिलते है। इनका प्रयोग औषधि रुप में भी किया जाता है।

मूत्र रोग: जिन लोगों के शरीर में ताप बढ जाने से मूत्र भी रुक-रुककर आने लगता है-ऐसे रोगी को चम्पा के फूलों का आधा कप रस मिश्री घोलकर सुबह-शाम पिलाने से मूत्र खुलकर आता है। एक हफ्ते के सेवन से शरीर भी शांत हो जाता है। बढा हुआ ताप खत्म हो जाता है।

बुखार: चम्पा के फूलों का रस बुखार को दूर करने में बहुत लाभदायक है। बुखार के रोगी को सुबह-शाम आधे कप रस में दो चम्मच शहद मिलाकर देने से तीन दिन में ही बुखार दूर हो जाता है।

योनि दुर्गन्ध: जिन महिलाओं को योनि से दुर्गन्ध आती है-उनका गृहस्थ जीवन नरक बन जाता है। ऐसी महिलाएं चम्पा के फूलों के रस में जूही के फूलों का रस मिलाकर एवं मुलेठी के चूर्ण में देसी घी डालकर, चारों चीजों को मिलाकर गोली बना लें और एक गोली प्रतिदिन योनि के अन्दर रखें। दस दिन के लगातार प्रयोग से ही योनि की दुर्गन्ध दूर हो जाएगी और उस महिला का जीवन स्वर्ग बन जाएगा।

आमवात तथा सन्धिवात: आमवात एवं जोडों के दर्द में रोगी को चम्पा के वृक्ष की जड का चूर्ण आधा-तोला सुबह-शाम शाहद के साथ सेवन कराने से चालीस दिन में ही उपरोक्त रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

वैसे इसकी जड का चूर्ण अनार्तव तथा कष्णर्तव में भी लाभदायक होता है।

Read More.


Go Back