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भव्य के फूलों से रोगोपचार

भव्य का हिन्दी नाम चालता करवल है। इस वृक्ष के पुष्प देखने में अत्यंत सुन्दर लगते हैं इसलिए इसे भव्य कहा जाता है। इसका फूल 10से.मी. से 15 से.मी. तक लम्बा होता है। इसके पत्ते भी बडे और सुन्दर होते हैं। इसके फूल का रंग सफेद होता है। इसके वृक्ष नेपाल से आसाम तक, बंगाल से कोकठा तक एवं गुजरात के कुछ भागों में पाये जाते हैं। इसके फूल को औषधि रुप में भी प्रयोग किया जाता है।

बुखार: बुखार के रोग में भव्य फूलों के रस का शर्बत बनाकर सुबह-शाम आधा-आधा गिलास रोगी को सेवन कराने से तीन दिन में ही गर्मी का बुखार दूर हो जाता है, और रोगी स्वस्थ हो जाता है।

हृदय रोग: दिल के मरीजों के लिए भव्य फूल का रस तो अमृत समान होता है। जिन लोगों का दिल कमजोर होता है-ऐसे रोगी को भव्य के फूलों का रस मिश्री अथवा शहद मिलाकर सुबह-शाम 20 दिन तक सेवन करायें। दिल में शक्ति भर जाएगी और हृदय रोग में लाभ पहुंचेगा।

कफ: जिन लोगों की छाती अथवा फेफडों में कफ (बलगम) जमा हो जाता है-ऐसे रोगियों को फूलों के रस का आधा कप सुबह-शाम सेवन करायें। पन्द्रह दिन के प्रयोग से ही छाती व फेफडों में जमा बलगम निकल जाएगा और नया कफ भी नहीं बनेगा।

स्वास्थ्य वर्धक: जो लोग शरीर से कमजोर होते हैं-उन्हें भव्य फूलों के रस का आधा कप, दो चम्मच शहद मिलाकर एक गिलास गाय के दूध के साथ रात को सोते समय सेवन करना चाहिए। 40 दिन के प्रयोग से ही शरीर की कमजोरी दूर होकर नई ताकत पैदा हो जाएगी। नया खून बनने लगेगा। रोगी के शरीर में नई स्फूर्ति भर जाएगी। नया जोश आ जाएगा

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