Print Document or Download PDF

मदकरा के फूलों से रोगों का उपचार

मदकरा को धातकी या धाय भी कहते हैं। इसके फूल बहुत चमकीले और रक्तवर्ण के होते है। इसके पौधे झाडियों की तरह होते हैं जिसकी शाखायें जमीन पर फैली रहती है। यह अधिकतर हिमालय की नीचे घाटियों में तथा मैदानी भागों में पाया जाता है। इसके फूल अप्रैल और मई के महीनों में खिलते है। इसका औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

बुखार: बुखार कैसा भी हो? मलेरिया हो, सर्दी का हो, मदकरा के फूल बहुत लाभकारी होते हैं। बुखार के रोगी को मदकरा के फूलों का 3 माशे चूर्ण आधा गिलास अनार के रस में दिन में दो बार सेवन कराना चाहिए। तीन दिन के सेवन से बुखार ठीक हो जाता है। बच्चों को केवल 1 माशे चूर्ण सेवन करना चाहिए।

नारी रोग: नारी के श्वेत प्रदर में मदकरा के फूलों का 3 माशे चूर्ण तंडुलोदक के साथ सुबह-शाम महिला रोगी को सेवन कराना चाहिए। 40 दिन के सेवन में श्वेत प्रदर का रोग खत्म हो जाता है।

दर्द, उदर रोग एवं कृमि रोग: उपरोक्त रोगों में रोगी को मदकरा के फूलों का 3 माशे चूर्ण तंडुदोलक के साथ मिलाकर सुबह-शाम दस दिन तक सेवन कराने से रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

अतिसार एवं आंव: जिन लोगों को अतिसार (आंतों मे घाव) का रोग अथवा पुरानी आंव का रोग होता है ऐसे रोगी को मदकरा के फूलों का आधा गिलास रस मिश्री मिला कर प्रतिदिन सुबह-शाम 20 दिन तक सेवन कराना चाहिए। रोग दूर हो जाता है ओर रोगी को आराम मिल जाता है।

Read More.


Go Back