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भृंगराज के फूलों से रोगों का उपचार

भृंगराज का पौधा पर्वतमालाओं की चोटियों पर प्राकृतिक रुप से जन्म लेता है। इसके फूल अक्टूबर माह में लगते हैं। फूलों के अन्दर का पंचांग औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है। भृंगराज के फूल तीन रंग के होते हैं। सफेद, पीले तथा सांवले।

पेट के रोग: पेट के हर रोग, जैसे पेट दर्द, पाचन क्रिया का ठीक न होना, जिगर खराब होना, तथा पित्त स्त्राव खराब होना आदि में भृंगराज के फूलों के पंचांग का रस व चूर्ण अत्यंत लाभकारी होता है। पेट के रोगी को पंचांग का चूर्ण, शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटायें। सात दिन के प्रयोग से ही समस्त रोग ठीक हो जाएंगे।

खांसी, कफ रोग: खांसी कैसी भी हो? नई हो, पुरानी हो या काली खांसी हो, भृंगराज के फूलों का पंचांग बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। ऐसे रोगी को पंचांग का रस दो चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटाना चाहिए। दस दिन में ही खांसी दूर हो जाती है। कफ साफ हो जाता है। काली खांसी में इसका प्रयोग 40 दिनों तक करना चाहिए-तभी लाभ होगा।

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