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कासनी के फूलों से रोगों का उपचार

कासनी के पौधे छोटे कद के होते हैं। कासनी के पुष्प मुंडक चमकीले नीले रंग के होते है। कासनी के फूलों की, गुलाब के फूलों की तरह खेती की जाती है। हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर तथा राजस्थान में यह सबसे अधिक पैदा किया जाता है। यह औषधि के रुप में अधिक प्रयोग किया जाता है। इसके फूलों की तासीर ठण्डी होती है।

जिगर रोग: जिन लोगों के जिगर खराब हो जाते हैं-ऐसे रोगी को कासनी के फूलों का एक छोटा गिलास शर्बत सुबह-शाम सेवन कराने से दस दिन में ही जिगर के रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

रक्त विकार: जिन लोगों के रक्त में विकार पैदा हो जाता है-उन्हें आधा गिलास कासनी के फूलों का रस नींबू के रस के साथ मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सेवन करायें। दस दिन में खून के विकार दूर हो जाएंगे और खून साफ हो जाएगा

गर्मी के बुखार एवं पित्त विकार: जिन लोगों को गर्मी का बुखार आ जाए और गर्मी के कारण पित्त भडक उठे-ऐसे रोगी को फूलों के रस का शर्बत दिन में दो बार सेवन करायें। तीन दिन के सेवन में ही बुखार दूर हो जाएगा और पित्त शांत हो जाएगा।

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