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चित्रक के फूलों से रोगों का उपचार

चित्रक के फूल सफेद रंग तथा लाल रंग की मंजरियों में होते हैं। इन फूलों की तासीर बहुत गर्म होती है-इसीलिए ये शरीर में अग्नि को बढा देते हैं। इसका पौधा उत्तर प्रदेश, दक्षिण भारत तथा बंगाल में पाया जाता है। इसके फूलों को औषधि के रुप में ही प्रयोग करते हैं।

गर्भपात: जो महिलायें बच्चें नहीं चाहतीं और फिर भी गर्भवती हो जाती है-ऐसी महिलाओं को चित्रक के फूलों का 3 माशे चूर्ण गुनगुने पानी से सुबह शाम तीन दिन तक सेवन करायें। गर्भपात हो जाएगा। इन फूलों के प्रयोग से 5 माह तक का गर्भपात हो जाता है।

मुंह के छाले: जिन लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं-उन्हें चित्रक के ताजा फूलों का छालों पर लेप करना चाहिए। तीन दिन के सेवन से ही मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

खांसी एवं गैस रोग: गैस अथवा खांसी के रोग में चित्रक के फूल काफी लाभदायक होते हैं। गैस और खांसी के रोगी को चित्रक के ताजा फूलों का रस मिश्री घोलकर दो चम्मच सुबह और दो चम्मच शाम को भोजन करने के बाद प्रयोग करना चाहिए। तीन दिन के सेवन से ही रोग खत्म हो जाएगा अर्थात खांसी ठीक हो जाएगी और गैस बननी बन्द हो जाएगी

कृमि एवं पांडव रोग: कृमि एवम् पांडव रोग में चित्रक के फूलों का 3 माशे चूर्ण गाय के ताजा दूध के साथ रोगी को सुबह शाम इस्तेमाल करना चाहिए। 20 दिन के इस्तेमाल में ही उपरोक्त रोगों में लाभ मिल जाता है। 40 दिन के प्रयोग से रोग खत्म हो जाता है।

दर्द एवं बवासीर: शरीर के जिस भाग में भी दर्द, हो अथवा बवासीर का रोग हो, ऐसे रोगी को चित्रक के ताजा फूलों का लेप सुबह शाम दर्द वाली जगह पर और बवासीर में मस्सों पर करना चाहिए। दस दिन के प्रयोग से ही बवासीर के मस्से झडकर साफ हो जाएंगे तथा दर्द से मुक्ति मिल जाएगी

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