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धमास के फूलों से रोगों का उपचार

धमास को आमतौर पर लोग धंवयास के नाम से भी पुकारते हैं। इसका पौधा आम तौर पर सूखी खुश्क जमीन पर होता है, इसलिए इसमें कांटे बहुत होते हैं। इसके फूल जून में खिलते हैं, जो केवल औषधि रुप में ही काम आते है।

खांसी: खांसी के रोग में धमास के फूलों का काढा बनाकर छान लें। फिर दो चम्मच काढे में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन दिन में तीन बार रोगी को सेवन करायें। तीन दिन के सेवन में ही खांसी दूर हो जाएगी।

रक्त-पित्त: रक्त-पित्त के रोग में धमास के फूलों का काढा बनाकर उसे छानकर ठण्डा कर लें। फिर उसमें थोडा सा चन्दन व मिश्री मिलाकर रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम दस दिन तक सेवन करायें। रक्त पित्त दूर हो जाएगा

गले के रोग:  गले के रोगों के लिए धमास के फूलों का काढा बनाकर उसमें थोडा-सा नमक डालकर रोगी को सुबह-शाम गरारें करायें। 20 दिन के प्रयोग से ही गले के समस्त रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

कुष्ठ एवं जलोदर रोग: कुष्ठ रोग एवं जलोदर में धमास के फूलों का काढा शहद मिलाकर रोगी को सुबह शाम सेवन कराने से तीन माह के अन्दर ही कुष्ठ रोग एवं जलोदर के रोग दूर हो जाएंगे।

अतिसार तथा ग्रहणी रोग: अतिसार और ग्रहणी रोग में भी धमास के फूलों का काढा दोनों वक्त सुबह-शाम रोगी को सेवन करायें। 60 दिनों के सेवन से ही अतिसार और ग्रहणी का रोग दूर हो जाएगा। रोगी को इन भयानक रोगों से आराम मिल जाएगा।

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