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अगस्त्य के फूलों से रोगों का उपचार

अगस्त्य का वृक्ष अगस्त्य मुनि के नाम से ही प्रसिद्ध है, क्योंकि अगस्त्य मुनि को यह वृक्ष अपने गुणों के कारण बहुत प्रय था। यह भारत वर्ष के मैदानी इलाकों में पाया जाता है तथा इस वृक्ष पर फूल जुलाई-अगस्त के महीनों में खिलते हैं। इसके फूल, पत्तों और जडों का प्रयोग औषधि के रुप में किया जाता है।

नेत्र रोग: अगस्त्य फूलों का रस आंखों में डालने से आंखों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं और आंखें निरोगी बनी रहती है।

कमजोरी: जिन व्यक्तियों का शरीर कमजोर होता है तथा शिथिल पडा रहता है। ऐसे रोगियों को अगस्त्य फूलों की सब्जी का सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। 40 दिन में ही व्यक्ति के शरीर में नया खून बनने लगेगा और व्यक्ति, स्वस्थ हो जाएगा, क्योंकि अगस्त्य के फूल व इसकी फलियां स्वास्थ्यवर्धक होती है।

मसूरिका रोग: जिन लोगों को मसूरिका का रोग हो जाता है-ऐसे रोगी को अगस्त्य के वृक्ष की छाल का काढा बनाकर सुबह-शाम आधा-आधा कप सेवन कराने से 20 दिन में ही इस रोग से मुक्ति मिल जाती है।

दर्द: दर्द शरीर के किसी भाग में भी हो? अगस्त्य वृक्षों के पत्तों को पीसकर शरीर के दर्द वाली जगह पर लेप कर देने से कुछ ही दिनों में दर्द दूर हो जाता है। इससे गठिया तक का रोग, चोट-मोच का दर्द भी दूर हो जाता है।

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