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मसालों में हल्दी से कई रोगों को ठीक करें

मसाले, हर घर में प्रयोग किये जाते हैं। चाहे वह गरम मसाले हों अथवा सब्जी बनाने वाले मसाले। प्रकृति ने इन मसालों में औषधि गुण भर दिए हैं। ये मसाले स्वास्थ्य के साथ-साथ रोगों को दूर करने में भी काम आते हैं। ये समस्त मसाले प्राकृतिक जडी-बूटियां हैं, जो रोगों के लिए संजीवनी बूटी का काम करती है।

हल्दी, प्रकृति की एक अनमोल देन है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मौजूद है। अनेक रोगों में यह हल्दी रामबाण औषधि का काम करती है। इसकी लकडी पीली होती है। इसके पौधे कांटेदार झाडियों जैसे होते हैं। इसमें अप्रैल से जून के महीने तक फूल खिलते हैं, जो अधिक पीले रंग के घनी मंजरियों के रुप में होते हैं। इसका फल यानि कि हल्दी की गांठ दो-तीन इंच लम्बा होता है। कभी-कभी गोल भी होता है। यह पौधा उत्तराखण्ड, गढवाल, कुमाऊं, हिमाचल प्रदेश, नेपाल सिक्किम तथा काश्मीर में पाया जाता है। रसौत नामक औषधि इसकी जड के काढे से तैयार की जाती है।

चोट, मोच और घाव होने पर: यदि किसी व्यक्ति के चोट लगने से घाव हो जाता है-ऐसे रोगी को घाव पर हल्दी को पुलटिस बांधनी चाहिए। एक चम्मच पिसी हुई हल्दी, दो चम्मच गेंहू का आटा, एक चम्मच सरसों के तेल, में थोडा-सा पानी डालकर आग पर पकाएं। जब सब चीजें पक कर हलवे की तरह तैयार हो जाएं तो घाव पर इसकी पुलटिस को सुबह शाम बांधें। कुछ ही दिनों में घाव भी भर जाएगा। दर्द भी दूर हो जाएगा ओर यदि सूजन है तो वह भी ठीक हो जाएगी।

गुम चोट लगने पर एक चम्मच पिसी हल्दी खिलाकर रोगी को ऊपर से एक गिलास दूध पिला दें। गुम चोट ठीक हो जाएगी।

चर्मरोग एवं खुजली: जिन लोगों को चर्मरोग हो जाता है। खास तौर पर खुजली का रोग और उसमें भी पकी खुजली। ऐसे रोगी को एक चम्मच पिसी हल्दी, 2 चम्मच चीनी, एक कप दूध तथा 25 ग्राम देसी घी को मिला कर प्रतिदिन सेवन करायें। सात दिन के सेवन में ही खुजली के रोग से लाभ मिल जाएगा।

खुजली पर लगाने के लिए हल्दी का लेप तैयार कर लें। 100 ग्राम सरसों का तेल, 250 मि.ली. दूब घास का रस 50 ग्राम पिसी हल्दी, तथा 100 ग्राम पानी, इन चारों चीजों को मिलाकर लोहे की कढाई में डालकर आग पर उबालें। जब यह मिश्रण खूब अच्छी तरह उबलकर आपस में मिल जाए तो इसे नीचे उतार कर कपडे में छान कर ठण्डा कर लें और कांच की एक शीशी में भर लें। प्रतिदिन खुजली वाले स्थान पर इस लेप को सुबह-शाम लगाएं। सात दिन में ही खुजली अथवा अन्य चर्म रोगों का नामो निशान मिट जाएगा।

सुजाक: जिन पुरुषों को सुजाक का रोग हो जाता है-ऐसे रोगी को एक चम्मच पिसी हल्दी एक गिलास गाय के दूध के साथ हर रोज 60 दिनों तक सेवन करायें। सुजाक का रोग दूर हो जाएगा।

ऐसे रोगी को गरम चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

(पीलिया) कामला होने पर: कामला रोग में हल्दी की जद का काढा, जिसे रसौत कहा जाताह ऐ। 4 रत्ती रसौत को 2 चम्मच शहद में मिलाकर रोगी को सुबह-शाम दस दिन तक सेवन करायें। कामला रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

हैजा होने पर: हैजे के रोग में 3 चम्मच रसौत-दो चम्मच शहद में एक कप पानी मिलाकर रोगी को सुबह, दोपहर, शाम दिन में तीन बार पिलाने से तीन दिन में ही हैजे का रोग ठीक हो जाता है।

मुंह के रोग एवं नाडी व्रण: जिन लोगों को मुंह में छाले हो जाते हैं, मुंह आ जाता है, गले में दर्द होने लगता है-कोई चीज खाई-पी नही जा सकती तथा जिन लोगों की नसों में खिंचाव या तनाव आ जाता है-ऐसे रोगियों को 2 चम्मच, रसौत एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम दस दिनों तक सेवन करायें। रोग दूर हो जाएंगे।

नेत्र रोग: हर प्रकार के नेत्र रोगों में पिसी हुई हल्दी का उपयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके सेवन मात्र से ही कुछ ही दिनों में नेत्र रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

नज़ला जुकाम: लोगों को अक्सर सर्दी के मौसम में नज़ले-जुकाम की शिकायत हो जाती है। ऐसे रोगियों को जिन्हें नजला-जुकाम है-एक चम्मच पिसी हल्दी को एक गिलास दूध में डालकर खूब उबालें। उसके बाद गुनगुना हल्दी दूध का सेवन करायें। दस दिनों के सेवन से ही नज़ले-जुकाम से छुटकारा मिल जाएगा

हल्दी विशेष तौर पर नारी रोगों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। नारी के हर रोग में हल्दी का उपयोग बहुत गुणकारी है।

स्तनों के रोग: महिलाओं के स्तनों में कई रोग उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे, स्तनों में गांठ पड जाना, स्तनों में अनचाही सूजन आ जाना। महिलायें शर्म की वजह से ऐसे रोगों को किसी डाक्टर को भी नहीं दिखा पाती। ऐसी महिलाओं के लिए हल्दी का उपयोग उन्हें इन रोगों से मुक्ति दिला देता है। स्तन रोगी महिलाएं हल्दी को पत्थर के चकले पर घिस कर ग्वार पाठे के रस में मिला कर स्तनों पर प्रतिदिन सुबह शाम लेप करें। दस दिन के प्रयोग से ही स्तनों की सूजन व दर्द दूर हो जाएगा और महिलाओं को घर बैठे ही रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

चेहरे के रोग: जिन महिलाओं के सुन्दर चेहरे पर काली झाइयां पड जाती है। धब्बे पड जाते हैं। कील मुंहासे निकल आते हैं, ऐसी महिलाओं को बेसन में थोडी सी हल्दी मिलाकर हर रोज नहाने से पहले चेहरे पर उबटन करना चाहिए। हाथ पैरों पर भी उबटन करें। एक माह के प्रयोग से ही चेहरे के सब धब्बे साफ हो जाते हैं और चेहरा भी पहले से भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगता है। शादी-विवाओं में हल्दी का प्रयोग नारी के रुप को निखारने के लिए ही किया जाता है।

गर्भ-निरोध: हल्दी का महत्तवपूर्ण उपयोग गर्भनिरोध में बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है, जो महिलायें बच्चे नहीं चाहती-ऐसी महिलाओं को मासिक धर्म पूरा होने के तुरंत बाद 3 माशे पिसी हल्दी का सेवन तीन दिन तक प्रतिदिन रात को करना चाहिए। गर्भ नहीं ठहरेगा। लेकिन यह विधि हर माह अपनानी होगी।

श्वेत प्रदर: श्वेत प्रदर का रोग अस्सी प्रतिशत महिलाओं को होता है। इस रोग में महिला रोगी को सफेद पानी जाता रहता है, जिससे उसके शरीर में दिन-ब-दिन कमजोरी आती चली जाती है। मानसिक तनाव बढने लगता है। शरीर शिथिल पड जाता है। ऐसी महिलाओं को एक चम्मच हल्दी (पिसी हल्दी) अथवा 3 रत्ती रसौत, शहद में अथवा चावल के पानी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम 40 दिन तक सेवन करायें। श्वेत प्रदर से छुटकारा मिल जाएगा।

प्रमेह रोग: महिलाओं को प्रमेह का रोग भी खतरनाक होता है। ऐसी महिलओं को भी पिसी हल्दी का एक चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन दो बार सुबह-शाम एक माह तक सेवन करायें। प्रमेह रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

प्रसव काल के बाद: महिलाओं के प्रसव काल के बाद उस प्रसूति महिला को हल्दी का अधिक से अधिक देसी घी व मेवाओं से बने हरीरे में सेवन कराया जाता है ताकि प्रसव के बाद उत्पन्न हुए महिला योनि के घावों को भरा जा सके।

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