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जीरे से रोगों का उपचार

जीरा घर में काम आने वाली एक आवश्यक वस्तु है, जिसके बिना दाल, सब्जी अथवा गरम मसाला नहीं बनता। जीरा दो तरह का होता है। एक सफेद जीरा, दुसरा काला जीरा।

सफेद जीरे से रोगों का इलाज: जीरे के वर्ग की तीन हजार किस्में पाई जाती है। सफेद जीरे के पत्ते बहुत ही साधारण होते हैं। इसके फूल छोटे, सफेद तथा हल्के गुलाबी रंग के होते है। इसकी खेती अधिकतर पंजाब, उत्तर प्रदेश, तथा गुजरात में की जाती है। जीरे की तासीर गर्म होती है।

विषम बुखार: जो बुखार चढता उतरता रहता है, वह विषम बुखार कहलाता है। ऐसे बुखार के रोगी के लिए 50 ग्राम सफेद जीरे को 20 ग्राम गुड के साथ खूब अच्छी तरह पीसकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बना लें। रोगी को दो-दो गोली दिन में तीन बार गाय के दूध के साथ सात दिन तक सेवन करायें। बुखार चला जाएगा और फिर लौट कर वापस नहीं आएगा।

पुराने बुखार: जिन लोगों का बुखार पुराना होकर मियादे पड जाता है उनके लिए 20 ग्राम जीरा, 20 ग्राम सौंठ, 5 ग्राम काली मिर्च, तीनों चीजों को कूटपीसकर छान लें और फिर उसमें गुड मिलाकर गोलियां बना लें। दो-दो गोली दिन में तीन बार पन्द्रह दिन तक गाय के दूध के साथ उन्हें सेवन करायें। पुराना मियादी बुखार जड से चला जाएगा।

पेट दर्द, गुर्दे एवं उदर रोग: जिन लोगों को गुर्दे और पेट की बीमारियां पैदा हो जाती है अथवा पेट में दर्द रहता है-ऐसे रोगी को जीरे और चीनी का चूर्ण बना कर एक-एक चम्मच दिन में तीन बार ताजा पानी के साथ एक माह तक सेवन करायें। उपरोक्त पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

बवासीर: बवासीर दो प्रकार की होती है। एक खूनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर। बवासीर के रोगी को कभी-कभी भयंकर दर्द उठता है।

जीरा, सौंफ, धनिया एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी आधा गिलास रह जाए तो उसे नीचे उतारकर छान लें। उस पानी में दो चम्मच देसी घी मिलाकर रोगी को सुबह-शाम दो-दो चम्मच 40 दिनों तक सेवन करायें। खूनी बवासीर ठीक हो जाएगी।

बादी बवासीर के रोगी के लिये जीरा और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। इस मिश्रण का हर रोज रोगी को एक-एक चम्मच सुबह-शाम गाय के दूध या ताजा पानी के साथ एक माह तक सेवन करायें। बादी के सब मस्से झर तथा रोग दूर हो जाएगा।

बवासीर के दर्द में रोगी को एक चम्मच जीरा, पांच काली मिर्च कूटपीसकर एक चम्मच शहद में सुबह-शाम 40 दिनों तक सेवन करायें। दर्द से छुटकारा मिल जाएगा।

जीरे से नारी-रोगों का उपचार:

महिलाओं के रोगों में भी जीरा काफी उपयोगी है।

श्वेत-प्रदर व दूध की कमी: जो महिलाएं लिकोरिया के रोग (सफेद पानी से पीडित होती है) तथा जिन महिलाओं के स्तनों में दूध की कमी होती है-ऐसी महिलाओं को भुना जीरा चीनी के साथ मिलकर सुबह-शाम एक एक चम्मच गाय के दूध के साथ दो माह तक सेवन करायें। सफेद पानी जाना बन्द हो जाएगा और स्तनों में दूध भी बढ जाएगा।

स्तनों की गांठें: दूध पिलाने वाली महिलाओं के स्तनों में गांठे पड जाती हैं-ऐसी महिलाओं के स्तनों पर जीरे को पनी में पीसकर सुबह-शाम उसका लेप करें। दस दिन के प्रयोग से ही गांठें ठीक हो जाएंगी।

चेहरे की सुन्दरता: जिन महिलाओं के चेहरों पर काले धब्बे पड जाते हैं, वे जीरे को पानी में डालकर उबालें। दस मिनट बाद पानी को नीचे उतार कर छानकर ठण्डा कर लें। फिर उस पानी से सुबह-शाम अपने चेहरे को साफ करें। दस दिन के प्रयोग से ही चेहरे, के काले धब्बे मिट जाएने और रुप निखर जाएगा।

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