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दालचीनी से रोगों का उपचार

दालचीनी का प्रयोग भी गरम मसाले में किया जाता है। इसके वृक्ष सदा हरे बने रहते हैं। इस वृक्ष की शाखायें चपटी तथा कोमल होती है। छाल पतली तथा मटमैले रंग की होती है। इस पर अप्रैल-मई में फूल आते हैं। दालचीनी गर्म तासीर की होती है। इसका प्रयोग गरम मसालों के अलावा औषधि रुप में भी किया जाता है।

वीर्य को वृद्धि करें: पुरुष के अन्दर वीर्य की कमी से शरीर में कमजोरी आ जाती है। ऐसे व्यक्ति को एक चम्मच पिसी दाल चीनी ठण्डे पानी से सुबह शाम सेवन करायें। 60 दिनों के सेवन से पुरुष के वीर्य में वृद्धि होती है और पुरुष के शरीर में नई शक्ति आ जाती है। नया जोश भर जाता है।

पेचिश होने पर: पेचिश के रोगी को एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम ठण्डे पानी से सेवन कराने पर दस दिन के प्रयोग से ही पेचिश चली जाती है।

गला एवं पेट के रोग: जिन लोगों को गले एवं पेट की बीमारियां लग जाती है-वे लोग दाल चीनी को कूट पीसकर छान लें। फिर हर रोज एक छोटा चम्मच दिन में तीन बार ताजा पानी के साथ सेवन करें। 20 दिन के सेवन से ही गले की बीमारियां तथा पेट के रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

गैस व कब्ज से छुटकारा: जिन लोगों को गैस एवं कब्ज की शिकायत हो-वे दालचीनी जीरा व इलायची तीनों को कूटपीस कर छान लें। कैसी भी कब्ज व गैस हो-रात को सोते समय इस चूर्ण का एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ पन्द्रह दिनों तक सेवन करें। कब्ज व गैस दोनों रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

राजयक्ष्मा एवं चर्म रोग: राजयक्ष्मा के रोग तथा चर्म रोगों में दालचीनी के तेल प्रयोग अत्यंत लाभकारी है। 100 ग्राम मीठे तेल में 50 ग्राम दाल चीनी कूट कर डाल दें और 100 ग्राम पानी डालकर उबालें। पानी जब सूख जाए तो उसे नीचे उतार कर छान लें। उस तेल की मालिश प्रतिदिन तीन बार शरीर पर पीडित जगह करें। दस दिन के सेवन से ही दोनों रोग खत्म हो जाएंगे।

सिरदर्द: जिन लोगों के सिर में दर्द है और सहन नहीं हो रहा उन लोगों के सिर पर दाल चीनी को पानी में पीसकर उसका लेप कर दें। कुछ ही देर में सिर दर्द दूर हो जाएगा।

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