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अजवायन से रोगों का उपचार

अजवायन एक जनोपयोगी पौधा है। इसकी भी गणना मसाले में आती है। इस पौधे पर फरवरी के महिने में फूल लगते हैं, जो छत्रक के रुप में होता है और उनका रंग सफेद होता है। अजवायन की खेती पूरे भारतवर्ष के मैदानी इलाकों में होती है। यह तासेर में गर्म होता है। इसका प्रयोग भी औषधि रुप में किया जाता है।

प्रसूति ज्वर: जिन महिलाओं को अजवायन का काढा बनाकर सुबह शाम पिलाने से केवल एक हफ्ते में बुखार चला जाता है।

प्रसव के बाद अजवायन का सेवन महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इसके सेवन से भूख खुलती है। पाचन-शक्ति भी बढती है।

गर्भपात: गर्भवस्था में महिलाओं को छोटी इलायची का काढा बनाकर सेवन करायें। इससे बच्चा भी सुरक्षित रहता है और प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म देने में महिला को अधिक कष्ट सहन नहीं करना पडता।

मूत्र रुकना: जब किसी व्यक्ति (स्त्री-पुरुष) को मूत्र रुक-रुककर आता हो और मूत्र के समय दर्द व जलन होती है-ऐसे रोगी के लिए, दो छोटी इलायची दूध में डालकर उबालें। फिर उसे ठण्डा करके एक चम्मच मिश्री मिलाकर पिला दें। तीन दिन के सेवन से ही मूत्र की जलन खत्म हो जाएगी। दर्द दूर हो जाएगा तथा मूत्र खुलकर आएगा।

हर प्रकार के दर्द: दर्द कैसा भी हो, सिर दर्द, बदन दर्द, पेट दर्द, जोडों का दर्द-पांच छोटी इलयची को कूट कर 250 ग्राम पानी में डालकर उबाल लें। काफी देर उबालने के बाद उस पानी को हल्का गुनगुना कर रोगी को पिलायें। दो तीन बार के सेवन से ही दर्द में आराम आ जाएगा। अधिक दिनों तक प्रयोग करने से दर्द पूर्ण रुप से दूर हो जाता है।

पेचिश व पेट दर्द: पेट दर्द में एक चम्मच अजवायन आधा चम्मच काला नमक, जरा सी हींग को मिलाकर कूट पीस लें और उस चूर्ण को ताजा पानी के साथ पीडित व्यक्ति सेवन करायें। दर्द बन्द हो जाएगा।

इस चूर्ण को दिन में तीन-चार बार पेचिश के रोगी को सेवन कराने से केवल तीन दिन में ही पेचिश ठीक हो जाती है।

यही नुस्खा गैस के रोगियों के भी लिए उपयोगी है। गैस के रोगी को यह चूर्ण कम-से-कम 20 दिन सेवन करना चाहिए। इससे पाचन-शक्ति भी बढती है और गैस भी दूर होती है।

दांत दर्द: दांत दर्द होने पर अजवायन को मुंह में डालकर चबाते रहने से दांत दर्द ठीक हो जाता है। इस विधि से दांत के अन्य रोगों में भी लाभ पहुंचता है। मुंह की दुर्गन्ध भी खत्म हो जाती है।

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