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राई से रोगों का उपचार

राई का पौधा भी सरसों जैसा ही होता है, किंतु इसकी पत्तियां सरसों जैसी नहीं होती। इसके फूल हल्के पीले रंग के होते हैं। इसका स्वाद कसैला होता है और बीज हल्के काले रंग के होते हैं। इसके फूल दिसम्बर जनवरी माह में खिलते हैं। यह बहुत गुणकारी होती है, जो औषधि रुप में भी प्रयोग की जाती है।

हैजा होने पर प्रयोग करें: आदमी पर हैजे का प्रकोप होते ही उसे दस्त शुरु हो जाते हैं। उल्टियां शुरु हो जाती है। ऐसी दशा में राई को पीसकर उसमें पानी मिला कर रोगी को पेट पर राई का लेप कर दें। कुछ ही देर में उल्टियां आनी बन्द हो जाएंगी और दस्त बन्द हो जाएंगे। हैजे का प्रकोप खत्म हो जाएगा, लेकिन यह उपचार प्राथमिक तौर प करने के लिए है। उसके बाद रोगी को डाक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए।

हिचकी होने पर: हिचकी का रोग बहुत ही कष्टकारी होता है। इस रोग के शुरु होने से व्यक्ति परेशान हो उठता है। हिचकी से बचाव हेतु दस ग्राम राई को 200 ग्राम पानी में डालकर उबाल लें। फिर उसे छानकर ठण्डा कर लें और इस पानी को रोगी को पिलायें। हिचकी बन्द हो जाएगी।

फोडे-फुंसियां: गर्मी के कारण जिन लोगों के फोडे-फुंसी निकल आते हैं। वे लोग राई को बारीक पीसकर लेप तैयार कर लें। फिर मलमल के साफ कपडे को फोडे-फुंसियों के स्थान पर रखकर उस पर लेप लगा दें। पन्द्रह मिनट बाद उस कपडे को उठाकर उस स्थान, को गर्म पानी से रुई से साफ कर दें। दस दिन तक यह विधि प्रयोग करें। फोडे-फुंसी अपने आप खत्म हो जाएंगे।

मिरगी: मिरगी के रोगी को जब मिरगी का दौरा पडे तो उसे फौरन राई पीसकर सुंघा दें। रोगी को तुरंत होश आ जाएगा।

जहर का असर: जो व्यक्ति जहर का शिकार हो जाए-ऐसे व्यक्ति को तुरंत 10 ग्राम राई का चूर्ण बनाकर ताजा पानी के साथ सेवन करा दें। जहर का असर खत्म हो जाएगा और व्यक्ति की जान बच जाएगी।

अजीर्ण रोग: अजीर्ण के रोगी को 2 ग्राम राई पीसकर पानी में घोलकर पिलाने से 15 दिन में ही रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

मासिक धर्म: जिन महिलाओं को मासिक धर्म ठीक से नहीं होता-उनकी दो ग्राम राई पीसकर ताजा पानी से हर रोज दिन तक सेवन करायें। मासिक धर्म सही समय पर होने लगेगा।

खांसी: खांसी के रोग में राई का रस आधा चम्मच शहद के साथ रोगी को सुबह शाम सेवन कराने से एक हफ्ते में ही खांसी का रोग दूर हो जाता है।

कमर दर्द, पक्षाघात एवं सन्धिवात: इन रोगों में दर्द वाले स्थान पर राई का लेप करने से 40 दिन में ही दर्द दूर होकर रोग से छुटकारा मिल जाता है

पेट रोग: पेट के रोगों में राई बहुत लाभकारी होती है। पेट दर्द, अपच, अफारा अथवा पेट गैस होने पर राई का पानी काला नमक डालकर रोगी को प्रतिदिन दस दिन तक सेवन कराने से, पेट के समस्त रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

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