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हिंग से रोगों का उपचार

हींग प्रकृति का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है। इसके पौधे को खेती द्वारा तैयार किया जाता है। औषधि उपयोग हेतु इसके पौधे के काण्ड एवं मूल में चीरा लगाकर उसका सफेद दूध जैसा गाढा रस प्राप्त करते हैं जो गोन्द की तरह होता है-वही हींग कहलाती है। इसकी खुशबू जरा-सा छू लेने पर ही सारे हाथों में फैल जाती है। इसमें औषधि के भरपूर्ण गुण भरे होते है।

पेट दर्द: पेट में कितना भी तेज दर्द क्यों न हो? ऐसे व्यक्ति की नाभि के आस-पास चारों ओर हींग को पानी में घिसकर उसका लेप कर दें तथा चने के दाने के बराबर हींग पेट दर्द के रोगी को पानी से खिला भी दें। कुछ ही देर में रोगी को आराम मिल जाएगा। दर्द बन्द हो जाएगा। सख्त पेट भी मुलायम हो जाएगा।

बदहजमी: जिन लोगों को बदहजमी की शिकायत रहती है। वे लोग हींग काला नमक, अजवायन तथा छोटी हरड को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटपीस कर छान लें। फिर उस चूर्ण का एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को ताजा पानी के साथ सेवन करें। एक हफ्ते के प्रयोग से ही बदहजमी दूर हो जाएगी। पाचन शक्ति भी बढ जाएगी।

दांत दर्द: दांतों को कीडा लगा हो और उससे दांतों में दर्द पैदा हो गया है तो पीडित स्थान पर हींग का एक छोटा सा टुकडा रखकर दांतों से दबा दें। कुछ ही क्षणों मे दर्द बन्द हो जाएगा। इसके बाद मुंह को खोलकर मुंह का पानी बाहर निकाल दें। कीडा भी बाहर निकल जाएगा।

नजला-जुकाम : जिन व्यक्तियों को नजले-जुकाम की शिकायत रहती है-ऐसे व्यक्ति को हींग का घोल बना कर दिन में कितनी बार सूंघने से बन्द नाक भी खुल जाती है और नजला जुकाम भी दूर हो जाता है

प्रसव कष्ट: प्रसव बहुत कष्टकारी होता हिअ, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान काफी कष्ट झेलना पडता है। ऐसी महिलाओं को प्रसव के दौरान आधा कप पानी में मटर के बराबर हींग को घोल कर पिला देने से बच्चा आसानी से हो जाएगा और महिला को कष्ट भी नहीं होगा।

गला बन्द होने पर: जिस व्यक्ति का गला बन्द हो जाने से आवाज भी बन्द हो जाती है- ऐसे व्यक्ति को चने के दाने के बराबर हींग को गर्म पानी में घोलकर, उस पानी से गरारे करायें। चाहें तो उस पानी में थोडा नमक भी मिला लें। हर दो घंटे बाद गरारे करते रहने से गले का विकार दूर हो जाएगा और बन्द आवाज खुल जाएगी।

अफीम का नशा: जो लोग गलती से अथवा जानबूझ कर अफीम खाकर नशे में बहकने लगते हैं-ऐसे व्यक्ति को 2 ग्राम हींग पानी में घोलकर पिला दें। कुछ ही देर में अफीम का असर खत्म हो जाएगा और व्यक्ति होश में आ जाएगा।

शरीर की बादी तथा बाय रोग: कुछ लोगों का शरीर बादी के कारण फूल जाता है जो कष्ट दायी होता है। कुछ के शरीर में वाय का प्रकोप भी हो जाता है। ऐसे व्यक्तियों को हींग की जड का चूर्ण बनाकर उसमें काला नमक मिलाकर सुबह-शाम एक-एक चम्मच ताजा पानी से सेवन करायें। 40 दिन के प्रयोग से शरीर के बादी खत्म हो जाएगी। वाय का रोग भी दूर हो जाएगा।

कामला रोग (पीलिया) : जिन लोगों को पीलिया रोग हो जाता है ऐसे लोगों को अपनी आंखों में, हींग को गुलाब जल में घोलकर प्रतिदिन अंजन करना चाहिए। पन्द्रह दिन के प्रयोग में ही कामला रोग दूर हो जाएगा।

सर्दी के बुखार: जिन को सर्दी लगने से बुखार आ जाता है- ऐसे व्यक्ति के लिए 1 ग्राम हींग, 2 ग्राम अजवायन, दो ग्राम सौंठ, थोडा-सा काला नमक कूट पीसकर चूर्ण बना लें। फिर एक चम्मच सुबह, एक चम्मच शाम गाय के दूध के साथ सेवन करायें। तीन दिन में ही बुखार उतर जाएगा।

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