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स्पा जा कर इन्द्रियों को रखे सक्रिय

स्पा को यूं तो लग्जरी उपचार माना जाता है, लेकिन आज की जीवनशैली में मध्यम वर्ग के लोग भी इसका लाभ ले रहे हैं। सेहतमंद रहने की हाह में अपनी इन्द्रियों को पूरी तरह सक्रिय रखने की कोशिश कर रहे हैं। 

Spa is considered as a luxury treatment, but in today's lifestyle, middle class people are also taking advantage of it. Trying to be healthy, keep your senses completely active.

स्पा थेरेपी किस तरह लाभकारी होते है आइये जाने: -

आज की व्यस्त जीवनशियली में खुद को रिलेक्स करने के लिए हर कोइ अपने अंदाज में नए नए तरीके अपनाता है, जैसे-मेडिटेशन, योगासन, म्यूजिक, टहलना आदि। ऐसी ही एक नेचुरल थेरेपी है स्पा, जो विभिन्न तरह की बॉडी मसाज, स्टीम बात और मेन्टल हीलिंक के जरिये दी जाती है। शरीर को स्वस्थ बनाना इसका मूल मन्त्र है। स्पा के अलग अलग क्षेत्र होते हैं, जैसे -हेयर स्पा, फेस स्पा, शोल्डर स्पा, फुट स्पा, हैण्ड स्पा, बैक स्पा, बॉडी स्पा। व्यक्ति की जरुरत के हिसाब से स्पा ट्रीटमेंट दिया जाता है। आप केवल बॉडी रिलेक्सेशन और शारीरिक खूबसूरती बढ़ाने के लिए स्पा लेना चाहते हैं या नींद न आना, मोटापा, जोड़ो के दर्द, बाल झड़ना, बेजान त्वचा, बदन दर्द, माइग्रेन, डिप्रेशन जैसी किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए यह आपके हाथ में है।

Spa is considered as a luxury treatment, but in today's lifestyle, middle class people are also taking advantage of it. Trying to be healthy, keep your senses completely active.

स्पा क्या है?

वास्तव में स्पा एक लग्जरी ट्रीटमेंट है, जो सदियों पहले शारीरिक दर्द में आराम और तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए यूरोपीय देशो से शुरू हुआ था। इसमें व्यक्ति को मिनरल बाथ दिया जाता है। स्पा थेरेपी धीरे धीरे पूरे दुनिया में फ़ैल गयी। आज यह जीवनशैली का हिस्सा बन गयी है। स्पा थेरेपी बड़े बड़े ब्यूटी पार्लर्स, स्पा सेंटर्स, हेल्थ क्लिनिक्स, आयुर्वेद केंद्रों, होटलों, रिजॉर्ट्स आदि में दी जाती है। म्यूजिक, विजुअल सीनरी, लाइट्स, फूल या अरोमा सुगंधो के जरिये स्पा में ऐसा माहौल बनाया जाता है की आने वाला व्यक्ति सब कुछ भूल जाता है और शारीरिक मानसिक स्टार पर रिलेक्स हो जाता है।

क्या हैं फायदे?

स्पा थेरेपी व्यक्ति के मन मस्तिष्क को तरोताजा करके ऊर्जा प्रदान करती है। यह शरीर पर बढ़ती उम्र के असर को काम करती है और सौंदर्य में निखार लाती है। यह तुरंत स्फूर्ति उत्पन्न करने वाला बॉडी रब है, जो त्वचा को पोषण प्रदान करने के साथ साथ ताजगी भी देता है। विभिन्न थेरेपी के माध्यम से शरीर से सेरोटोनिन हारमोन निकलता है, जो व्यक्ति को स्वास्थ सम्बन्धी कई समस्याओं से राहत महसूस कराता है। स्पा मूलतः शरीर में रक्त संचार को ठीक करता है और शरीर के विभिन्न सेल्स में ऑक्सीजन पहुंचाने और शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो या फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने का काम करता है।

इन्द्रियों को करे सक्रीय 

थेरपिस्ट विभिन्न थेरेपी के जरिये व्यक्ति की इन्द्रियों या सेन्स (सूंघना, देखना, सुनना, टेस्ट, टच, फील करना) को सक्रीय करते हैं। और उन्हें सकारात्मक जिंदगी की और प्रवृत्त होता है। स्पा ट्रीटमेंट में व्यक्ति को सबसे पहले और आखिर में पिलाई जाने वाली हर्बल चाय से टेस्ट यानी जीभ की इन्द्रियों को एक्टिवेट किया जाता है। जिस कमरे में स्पा किया जाता है, उसका वातावरण व्यक्ति पर सबसे जयादा प्रभाव डालता है। यहां तक की थेरेपिस्ट की आवाज और बोलने का लहजा भी आपको रिलेक्स करने में काफी मायने रखते हैं। व्यक्ति की स्मेलिंग पावर को वहां डेकोरेट किए फूलों, अरोमा कैंडल्स, डिफ्यूजर, मसाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एसेंशियल ऑयल की भीं खुशबू मजबूत करती है। इसके अतिरिक्त मसाज, प्रेशर या स्पा की विभिन्न थेरिपियों से व्यक्ति की स्पर्श और मशासूस करने की छमता बेहतर होती है। कई बार व्यक्ति शारीरिक मानसिक तौर पर इतना रिलेक्स हो जाता है की उसे नींद आ जाती है।

स्पा की थेरेपी के प्रकार 

स्पा मसाज 

मसाज या मालिश स्पा में प्रमुख है। यह करीब 45 मिनट से घंटे भर की जाती है। आम मसाज से अलग थेरेपिस्ट स्पा मसाज में व्यक्ति की इन्द्रियों को सक्रीय करता है, जिसने बीमारियों का इलाज होता है। गुलाब, चमेली, लैवेंडर, नीम टिल के ऑयल से मसाज की जाती है। शरीर के अलग अलग प्रेशर जोन्स पर समुचित दबाव डालकर व्यक्ति को रिलेक्स किया जाता है।

मुख्य मसाज 

स्वीडिश मसाज (बॉडी पर गोलाई शेप के मूवमेंट्स में कम प्रेशर से), बेलिनीस मसाज (बॉडी के विभिन्न एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर ज्यादा प्रेशर के साथ), इंडोनेशियन मसाज (मीडियम प्रेशर के साथ), थाई मसाज (पाउडर के साथ), डीप टिशू मसाज (काफी ज्यादा प्रेशर के साथ) आदि प्रमुख मसाज हैं। 

पंचकर्मा थेरेपी 

भारत की कैराली स्पा थेरेपी पंचकर्मा में शरीर की पांच इन्द्रियों पर काम किया जाता है। इसमें पूर्वकर्म और प्रधानकर्म दो भाग है। पूर्वकर्म कराना अनिवार्य है। स्नेहन में घी या तेल पिलाकर और मालिश कर दोषों को दूर किया जाता है तो स्वेदन में शरीर से पसीना निकाल कर बीमारियां दूर की जाती है। 

लावा शैल थेरेपी 

ज्वालामुखी के लावा से बने शैल से बॉडी मसाज की जाती है। वेन्स में ब्लॉकेज होने पर रक्त का बहाव ठीक से नहीं हो पाता और व्यक्ति के शरीर का ताप एक जैसा नहीं रहता। शरीर के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग तापमान महसूस होता है, जिससे शरीर में दर्द और थकावट रहती है। लावा शैल थेरेपी से शरीर का तापमान ठीक हो जाता है। 

एक्यूपंक्चर स्पा थेरेपी 

शरीर में जकड़न, हाथ पैरें में तालमेल की कमी, सर्वाइकल, साइनस, नस चढ़ने जैसे स्थिति में यह थेरेपी कारगर है। व्यक्ति की जरुरत के हिसाब से छोटी -छोटी सुइयां एक्यूपॉइंटस स्किन में लगाई जाती है। इनसे शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संचार होता है। 

वाटर स्टीम बाथ 

त्वचा की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को एक मांजी पर लिटा दिया जाता है। एक बड़े टब में कई तरह की जड़ी बूटियां डालकर पानी उबाला जाता है। इस टब को मांजी के नीचे रख दिया जाता है और 25 - 30 मिनट के लिए स्टीम दी जाती है। इससे निकलने वाली स्टीम से उस व्यक्ति के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा की डीप क्लीनजिंग हो जाती है।

सोना स्टीम बाथ 

इसमें व्यक्ति को स्टीम चैंबर में बिठाया जाता है। कमरे में कोयले से पथ्थरों को गर्म किया जाता है, जहां उन्हें 25 -30 मिनट तक स्टीम दी जाती है। 

अरोमा थेरेपी 

इसमें टिल के तेल में युकलिप्टस, गुलाब, लैवेंडर, चमेली जैसे खुशबूदार अरोमा ऑयल मिलाकर मसाज की जाती है। स्पा के दौरान इन फूलों की कैंडल भी जलाई जाती है, जिसकी भीनी खुशबू से व्यक्ति रिलेक्स्ड होता हैव

मड थेरेपी 

त्वचा की समस्या, नसों में ब्लॉकेज की समस्या की वजह से शरीर में ठीक से रक्त संचार न होना, बदन दर्द, थकावट आदि स्थिति में यह थेरेपी दी जाती है। मिट्टी में नीम की पीसी पत्तियां और दूसरी जड़ी बूटियां मिलाकर शरीर पर लगाई जाती है। इनमें डीप सी मड, मिनरल्स से भरपूर डेड सी मड, इजराइल और मुल्तानी या गाछी मिट्टी होती है, जो काफी असरारदार साबित होती है और काफी रहत होती है।

हॉट स्टोन या चक्र थेरेपी 

शरीर के विभिन्न चक्रों में आए असंतुलन की वजह से बदन दर्द, पेट दर्द जैसी समस्याएँ होती है। इसमें बेसाल्ट स्टोन्स को 120 -130 डिग्री तापमान पर पानी में गर्म करके तेल में डुबोया जाता है। इनसे पीठ और रीढ़ की हड्डी के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर हल्का दबाव देते हुए 30 मिनट मसाज की जाती है। फिर इन्हें रीढ़ की हड्डी पर 15  -20 मिनट तक रखा जाता है।

पोटली थेरेपी 

इसमें नीम, चन्दन जैसी अलग-अलग जड़ी बूटियों को मिलाकर सूती कपडे में बांधकर पोटली बनाई जाती है। इसे नियत ताप पर हल्का गर्म किया जाता है। सिंकाई के साथ - साथ शरीर के प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव देकर मसाज की जाती है। 

बॉडी रैप 

दूध में फलों के पल्प, जड़ी बूटियों के गाढ़े पैक आदि को शरीर पर लगाकर 25 -30 मिनट के लिए सूती कपडे से लपेटा जाता है और शरीर को डीटॉक्सिफाई करता है। इसके बाद स्नान कराकर इसेंशियल ऑयल से मसाज की जाती है। 

स्पा कितने अंतराल पर 

स्पा एक लग्जरी ट्रीटमेंट है। इसे महीने में एक ही बार कराना ठीक हैव 12 सिटिंग का पॅकेज भी दिया जाता है। दी जाने वाली थेरेपी के हिसाब से इसकी कीमत तय की जाती है। इसकी कीमत 1200 रूपए से 12 ,000 रुपये तक हो सकती है।

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