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12वीं कॉमर्स साइड से करने के बाद ये आपके लिए सही है

Feed by Manisha Cat- Education

आज के समय में गणित एवं विज्ञानं के अलावा भी कई ऐसे विषय है, जो कैरियर के लिहाज से बेहतरीन सम्भावनाओं की और ले जाते हैं. कॉमर्स यानी वाणिज्य भी एक ऐसा ही विषय है. हाल के वर्षो में छात्रों के बीच कॉमर्स एक लोकप्रिय विषय के तौर पर उबारा है. कॉमर्स विषय के तौर पर चुनौतीपूर्ण होने के साथ साथ आगे बढ़ने के कई रास्ते खोलता है. अगर आप संख्याओं से प्यार करते हैं, आपके पास लॉजिकल एवं एनालिटिकल दिमाग है, तो कॉमर्स आपके लिए उत्कृष्ट विकल्प है. जानिए कॉमर्स से 12 वीं करने के बाद भविष्य की किन किन राहों को चुन सकते है:- 

In today's time, there are many topics other than mathematics and science, which lead to better career prospects. Commerce is also one such topic. In recent years, commerce has emerged as a popular subject among the students. As a commerce subject to being challenging, it opens many ways to move forward. If you love numbers, you have logical and analytical brains, then commerce is an excellent choice for you. Know which of the future can be selected after commerce with 12th: -

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बैचलर ऑफ़ कॉमर्स 

बैचलर ऑफ़ कॉमर्स (बीकॉम) तीन वर्षीय स्नातक डिग्री है. कॉमर्स से 12वीं करने के बाद आमतौर पर छात्र बीकॉम में ही प्रवेश लेते हैं. बीकॉम के बाद आप किसी भी प्रोफेशनल कोर्स, जैसे एमबीए, पीजीडीएम आदि में प्रवेश ले सकते हैं. उच्च शिक्षा हासिल करने यानी एमकॉम, एमफिल, पीएचडी का रास्ता भी बीकॉम से ही बनता है. बीकॉम के बाद आप सीए या सीएस भी कर सकते हैं. सिविल सर्विसेज परिक्षा के माध्यम से प्रशासनिक सेवा या राजस्व में भी जा सकते है. 

बीकॉम (ऑनर्स)

यह कोर्स बीकॉम के सामान है, लेकिन किसी विशेष विषय में स्पेशलाइजेशन इस डिग्री कोर्स को महत्वपूर्ण बनाता है. स्पेशलाइजेशन के लिए अकाउंटेंसी, मैनेजमेंट, इकोनॉमिक्स, मार्केटिंग मैनेजमेंट, फाइनेनशियल मैनेजमेंट, इंटरनेशनल ट्रेड एन्ड फाइनेंस, इ- कॉमर्स, बैंकिंग या ह्यूमन एन्ड रिसोर्स मैनेजमेंट में से कोइ एक विषय चुन सकते हैं. इंडस्ट्री में सामान्य बीकॉम की तुलना में बीकॉम (ओनर्स) की ज्यादा मांग है. हलांकि प्रेवश मानदंड और पात्रता शर्ते दोनों कोर्स के लिए लगभग एक सामान होती है. दोनों में बड़ा अंतर ये है की बीकॉम (ऑनर्स) में वाणिज्य के विषयों का अधिक गहराई और विस्तार से अध्यन करना होता है.

चार्टर्ड अकाउंटेंट 

कॉमर्स से 12वीं करने के बाद सीपीटी परिक्षा से चार्टर्ड अकउंटेंट (सीए) के कोर्स में प्रवेश लेना उम्दा विकल्प है. आज भारत सहित विदेशों में भी सीए की बहुत मांग है और यह बेहद सम्मानजनक प्रोफेशन है. चार्टर्ड अकांटेंट प्रोग्राम एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसके तीन भाग है- कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) (अगर आप बीकॉम के बाद सीए में एडमिशन लेते हैं, तो सीपीटी की आवश्यकता नहीं होती), इंटीग्रेटेड फ्रोफेशनल कॉम्पिटेंस कोर्स (आईपीसीसी) एम् फाइनल कोर्स. सीए के कैरियर के लिए लॉ, अकाउंटेंसी, इकोनॉमिक्स, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड विषय महत्वपूर्ण है. इंटीग्रेटेड फ्रोफेशनल कॉम्पिटेंस कोर्स (आईपीसीसी) पास करने बाद आर्टिकिल्ड कलर्क/ऑडिट क्लर्क की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते है. इस रजिस्ट्रेशन से पहले कम्प्युटर ट्रेनिंग के 100 घंटे भी अनिवार्य है, जोकि सीपीटी या आ आईपीसीसी के साथ ही की जा सकती है. एक योग्य चार्टर्ड अकउंटेंट के पास बहुत से विकल्प होते है, वह सरकारी सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या प्राइवेट सेक्टर में आकर्षक पद पर नौकरी कर सकता है. सी के लिए कैपिटल मार्केट, बिजनेस हाउसेज और इंडस्ट्री में अनेक अवसर मौजूद हैं. एक सीए के तौर पर अपनी स्वयं की कंसल्टेंसी भी शुरू कर सकते ह ऐन या प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं. सीए के पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने के साथ कंपनियों की फाइनेंशियल अकाउंटिंग या टेक्सेशन डिपार्टमेंट में काम करने का विकल्प होता है. कॉर्पोरेट फाइनेंस, ऑडिटिंग फार्म्स, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी आदि में सेवाएं दे सकते हैं. भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विदेशों में भी अच्छी मांग है. छोटी बड़ी सभी कंपनियों को अकाउंट्स औडिट कराने के लिए पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की जरुरत होती है.

बीकॉम इन अकाउंटिंग एन्ड फाइनेंस 

बैचलर ऑफ़ कामर्स इन अकाउंटिंग एन्ड फाइनेंस, जिसे बीएसएफ कोर्स के नाम से भी जाना जाता है, एक तीन वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है. मुम्बई विश्व विद्यालय समेत देश के कुछेक विश्विध्य्लयों में संचालित होनेवाले इस कोर्स में अकउंटिंग एवं फाइनेंस का प्रशिक्षण दिया जाता. अकाउंटिंग और फाइनेंस के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिहाज से यह एक अच्छा कोर्स है. बीएएफ के बाद फाइनेंस में एमकॉम या एमबीए कर के आप अपने कैरियर और ऊंचाई दे सकते है. 

बैचलर ऑफ़ इकोनॉमिक्स 

कॉमर्स से 12वीं के बाद बैचलर ऑफ़ इकोनॉमिक्स भी एक विकल्प है आगे बढ़ने का. इसमें विभिन्न अर्थशास्त्रीय अवधारणाओं. आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों आदि की व्यावहारिक पढ़ाई कराई जाती है. आप अर्थशास्त्र में गहरी रूचि रखते है अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ के तौर पर आगे बढ़ाना चाहते है, तो इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन कर सकते है. यदि आप भारतीय प्रशासनिक सेवाकी तैयारी करना चाहते है, तो इस कोर्स की पढ़ाई का आपको अतिरिक्त लाभ मिलेगा. 

स्टॉक ब्रोकिंग एवं इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट 

स्टॉक एक्सचेंज एक संकेतक के तौर पर देश की अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यहाँ शेयर खरीदे और बेचे जातेहै. स्टॉक ब्रोकर व्यक्तियों और संस्थाओं की ओर से शेयर खरीदते ओर बेचते है, वहीं इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट निवेश अपनी सेवाएं देते है. कॉमर्स के छात्रों के लिए यह बेहतरीन सम्भावनाओं वाला कार्य क्षेत्र है. इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ़ इंडिया. ऑल इण्डिया सेंटर फॉर कैपिटल मार्केट स्टडीस, मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइनेशनल एन्ड इन्वेस्टमेंट plaaning, इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिसिस ऑफ़ इंडिया स्टॉक ब्रेकिंग में कोर्स कराते हैं. 

बैचलर ऑफ़ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन 

बैचलर ऑफ़ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) वैसे तो किसी भी स्ट्रीम से 12वीं करने के बाद कर सकते है, लेकिन कॉमर्स के छात्रों में यह कोर्स खासा लोक्रप्रिय है. तीन वर्ष के इस कोर्स में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का अध्ययन करना होता है. इस कोर्स को पूरा करने के बाद चाहे तो किसी भी कंपनी में एचआर फाइनेंस एड सेल्स ओर मार्केटिंग डिपार्टमेंट में जॉब शुरू कर सकते है. बीबीए के बाद एमबीए कर के कैरियर को ओर बेहतर दिशा दे सकते है. 

कंपनी सेक्रेटरी 

12वीं कॉमर्स के बाद एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर लोकप्रिय है कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) का कोर्स. सीएस कोर्स करानेवाली देश की एकमात्र संस्था है- दइंस्टीट्यूट ऑफ़ कंपनी सेक्त्रेट्रीज ऑफ़ इंडिया (आईसीएसआई). यह संसदीय अधिनियम द्वारा स्थापित संवैधानिक निकाय है. कंपनी सेक्रेटरी बनाने के लिए तीन स्टार पर परिक्षा पास करनी होती है- फाउंडेशन, एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम एवं फ्रोफेशनल प्रोग्राम. फ्रोफेशनल प्रोग्राम ओर ट्रेनिंग के बाद आईसीएसआई के एसोसिएट सदस्य बन जाते है. जॉब मार्केट में कंपनी सेक्रेटरी की बहुत मांग है.

बीकॉम एलएलबी 

बीकॉम एलएलबी यानी बैचलर ऑफ़ कॉर्मस एन्ड बैचलर ऑफ़ लेजिस्लेटिव लॉ एक पांच वर्षीय प्रोफेशनल इंटीग्रेटेड कोर्स है, जिसमे कॉमर्स से 12वीं करने के बाद प्रवेश ले सकते है. इसमें वाणिज्य एवं व्यापार के साथ क़ानून की पढ़ाई होती है. इस कोर्स में लीगल थ्योरी एवं प्रैक्टिस के साथ ट्रेड एवं कॉमर्स का विशेष अध्ययन कराया जाता है. कॉमर्स के साथ लॉ की डिग्री हासिल करनेवालों की बहुत मांग है. बीकॉम एलएलबी के बाद पेशेवर वकील के तौर पर कैरियर बना सकते है. 

कास्ट एन्ड मैनेजमेंट अकउंटेंट 

सर्टिफाइड कास्ट अकाउंटेंट कास्ट अकाउंटिंग रिकॉर्ड बनाने, कोस्ट ऑडिटिंग करने, उत्पादों के नियोजा, नियंत्रण और लागत में मदद करते हैं. कॉमर्स के छात्रों के लिए कास्ट एन्ड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (सीएमए) कोर sek अच्छा कैरियर विकल्प है. सीएमए कोर्स का संचालन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट ऑफ़ इंडिया या आईसीडब्ल्यूएआई करता है. सीएमए के तौर पर निजी प्रैक्टिस कर सकते है अथवा सार्जनिक या आईजी उद्द्मों में प्रबंधकीय पद पर काम कर सकते हैं.              

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