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इ-लर्निंग बेहतर शिक्षा का है जरिया 

Feed by Manisha Cat- Education

आधुनिकता के विस्तार से जन्मे ऑनलाइन लर्निंग के कांसेप्ट ने न सिर्फ दूर दराज इलाके छात्रों को उच्च शिक्षा की और बढ़ने का अवसर प्रदान किया है, बल्कि उनकी बड़े संस्थानों के शिक्षकों से पढ़ने की हसरत को भी पूरा किया है. इसी के चलते ऑनलाइन लर्निंग आज न सिर्फ बेहतर शिखा प्राप्त करने का जरिया बन गया है, बल्कि यह ट्रेंड एक बड़े व्यवसाय का रूप भी लेता जा रहा है. हाल में सामने आयी एक रिपोर्ट की माने, तो वर्ष 2021 तक देश का इ शिक्षा बाजार आठ गुना बढ़ कर 1.96 अरब डॉलर तक हो जाएगा.

e-Learning is a better education tool

e-Learning is a better education tool

पिछले कुछ समय से खराब गुणवत्ता के कारण भारत की पारम्परिक शिक्षा प्रणाली की लगातार आलोचना हो रही है. अब छात्रों ने इस समस्या को दूर करने का रास्ता ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए ढूंढ निकला है. उच्च स्टार की शिखा प्राप्त करने के लिए छात्रों की ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टमपर निर्भरता काफी तेजी से बढ़ती जा रही है.

करोड़ों छात्र कर रहे हैं इ लर्निंग 

इ लर्निंग पर हुए एक सर्वे के मुताबिक़ आज 12.5 करोड़ से अधिक लोग 2150 कक्षाओं की सामग्री को इंटरनेट के जरिये प्राप्त कर रहे है. मौजूदा समय में सैकड़ों विश्वविद्यालय और संस्थान इंटरनेट के जरिये अपने पाठ्यक्रम दुनियाभर में पहुंचा रहे हैं. वहीं देश में छह से 12वीं कशा के करीब दो करोड़ छात्र ऑनलाइन एजुकेशन लेना चाहते हैं. विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन लर्निंग वेबसाइट करसेरा की कमी के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है. 

ऑनलाइन ट्यूटरिंग का बाजार 

भारत में प्राइवेट स्कूलों में पढ़नेवाले लाखों छात्र ऐसे हैं, जो अच्छे शिक्षकों के अभाव के चलते बेहतर शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे संस्थानों को लगभग 20 लाख शिक्षकों की आवश्यकता है. एक और जहां, छात्र बेहतर शिक्षा के लिए ऑनलाइन लर्निंग का रुख कर रहे हैं, वहीं दूसरी और, यह चलन ऑनलाइन ट्यूटरिंग के बिजनेस ट्रेंड को भी बढ़ावा दे रहा है. आज हजारों युवा बेहतर शिखा को आमजन तक पहुंचाने के लिए एडटेक के व्यवसाय में उतर रहे हैं. इस क्षेत्र के बेहतरीन एजुकेशन स्टार्टअप्स के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वेदांतु में अब तक 80 फीसदी की प्रतिधारण दर के साथ 35000 स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन करा चुके है. 80 फीसदीक़ी प्रतिधारण दर के साथ ब्रेनर एडटेक में 1600 छात्र एवं 40 शिक्षक रजिस्ट्रेशन करा चुके है. एक लाख छात्रों और 25000 ट्यूटर्स के रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के बाद एजुविजार्ड ने अपने यहां रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए. वहीं हैलोकलास पर 120000 छात्र और 5000 ट्यूटर्स है.

कंपनियां दे रही हैं इस ट्रेड को बढ़ावा 

ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करनेवालों में प्रोफेशनल्स भी शामिल है. कर्मचारियों की लगातार लर्निंग न सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस के लिए, बल्कि कम्पनी के विकास के लिए जरूरी होती जा रही है. आज प्रमुख कंपनियां अपने कर्मचारियों को माइक्रो लर्निंग और कवालीफिकेशनकेन्द्रित लर्निंग, दोनों के लिए इ लर्निंग को बढ़ावा दे रही है. 

भारत बन रहा इ लर्निंग कंटेंट का स्त्रोत 

जुलाई, 2014 की दोसबो रिपोर्ट के मुताबिक़, इ लर्निंग का दुनियाभर में बाजार 2011 में 35.6 अरब डॉलर रहा. पांच साल का सकल वार्षिक ग्रोथ रेट करीब 7.6 फीसदी आंका गया, इसलिए इसकी कमाई 2016 तक 51.5 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया. इ लर्निंग के मामले में भारत के विशेषज्ञों का अनुमान है की इंडस्ट्री 2018 तक 1.29 अरब डॉलर तक पहुंचानेवाली है, जबकि कुछ अति आशावादी सूत्रों के मुताबिक़ बाजार काफी बड़ा हो सकता है, यानी 2018 तक 40 -60 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है.    

पेड़ यूजर्स की संख्या में होगा बड़ा इजाफा 

सर्च इंजन गूगल और प्रोफेशनल सर्विस फर्म केपीएमजी द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट में दावा किया गया है की यह इंडस्ट्री वर्ष 2021 तक 1.96 बिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुँच जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत की इ -एजुकेशन इंडस्ट्री वर्ष 2016 में 247 मिलियन डॉलर की थी. प्राथमिक शोथ पर आधारित इस रिपोर्ट को 27 शहरों के 3600 लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है. रिपोर्ट में वर्ष 2021 तक इ -एजुकेशन के क्षेत्र में पेड़ यूजर्स की संख्या में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद जताई गयी है. इस अनुमान के मुताबिक़ वर्ष 2016 में मौजूद 1.6 मिलियन पेड़ यूजर्स की संख्या वर्ष 2021 तक बढ़कर 9.6 मिलियन की हो जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में शिक्षा से सम्बंधित होनेवाली ऑनलाइन सर्च में पिछले दो साल में दो गुना बढ़ोतरी हुई है.  

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